चंडीगढ़वासियों को हैपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से बचाने और जागरूक करने के लिए गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एंड लिवर फोरम ने सोमवार को हेल्पलाइन नंबर 0172-5068816 जारी किया।
फोरम के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. संदीप धवन ने बताया कि यह हेल्पलाइन नंबर 28 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व हैपेटाइटिस दिवस के उपलक्ष्य में जारी किया गया है। फोरम के कन्वीनर डॉ. गुरबिलास पी. सिंह ने बताया कि हेल्पलाइन पर सुबह 8 से रात 8 बजे तक विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे, जो हैपेटाइटिस से जुड़ी हर तरह की जानकारी देंगे।
उन्होंने कहा कि हैपेटाइटिस के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 28 जुलाई को यह दिन मनाया जाता है, जो सिरोसिस और लिवर कैंसर सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। पीजीआई हेप्टोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख प्रो. वाईके चावला ने बताया कि ये वायरस कोई भी महत्वपूर्ण लक्षण या संकेत दिए बिना जिगर को संक्रमित करते हैं।
कई बार उनका आकस्मिक रूप से ही डायग्नोस किया जाता है, इसलिए उन्हें साइलेंट किलर कहा जाता है। हैपेटाइटिस सी क्रॉनिक हैपेटाइटिस का सबसे आम कारण है और हैपेटाइटिस बी के साथ मिलकर लिवर कैंसर का प्रमुख कारण बनता है।
हैपेटाइटिस होने का कारण वायरल इंफेक्शन
हैपेटाइटिस ए, बी या सी वायरस इसका मूल कारण है।
ऑटो इम्युन कंडीशन
कभी-कभी शरीर के इम्युन सेल से यह पता चलता है कि लिवर का सेल क्षतिग्रस्त हो रहा है।
एल्कोहल इनटेक
एल्कोहल सीधे लिवर से मेटाबॉलाइज्ड होता है, जिससे यह शरीर के दूसरे भागों में भी संचारित होने लगता है। इसलिए अत्यधिक मात्रा में एल्कोहल का सेवन करने से हेपैटाइटिस होने का खतरा होता है।
ज्यादा मात्रा में दवा लेने से
कुछ दवाइयों का सेवन जब बहुत ज्यादा होने लगता है, तब इसका विषाक्त पदार्थ लिवर सेल के सूजन का कारण बन जाता है।
हैपेटाइटिस के लक्षण
त्वचा और आंखों का पीला पड़ जाना, पेशाब का रंग गहरा हो जाना, ज्यादा थकान महसूस होना, मिचली, उल्टी, पेट दर्द और सूजन, खुजली, भूख कम लगना, वजन कम होना।
ट्रीटमेंट या इलाज
एक्यूट हैपेटाइटिस (एचएवी एंड एचईवी) से कुछ हफ्ते में राहत मिल जाती है। क्रॉनिक हैपेटाइटिस के लिए दवा लेने की जरूरत होती है। लिवर खराब हो जाने पर लिवर ट्रांसप्लांट भी एक विकल्प है।
ऐसे करें बचाव
अपना रेजर, टूथब्रश और सूई को किसी से शेयर न करें, इससे इंफेक्शन का खतरा कुछ हद तक कम किया जा सकता है। टैटू बनवाने से बचें, अच्छी तरह से स्टरलाइज्ड उपकरणों से ही कान छिदवाए।