चंडीगढ़। पीजीआई में बार-बार लग रही आग की घटनाओं को लेकर सोमवार को पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने पीजीआई, नगर निगम, प्रशासन, इंजीनियरिंग और संबंधित विभागों के साथ एक लंबी बैठक की। प्रशासक ने पीजीआई की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। अग्नि सुरक्षा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पालन में पीजीआई के ढुलमुल रवैये पर प्रशासक काफी नाराज हुए। अधिकारियों को फटकार भी लगाई और जल्द मानकों को पूरा करने के आदेश दिए।
प्रशासक ने पीजीआई अधिकारियों को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने, नेशनल बिल्डिंग कोड मानदंडों का अनुपालन करने और मरीज-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए युद्ध स्तर पर आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पीजीआई को सुविधा निरीक्षण करना चाहिए, नियमित रूप से कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना चाहिए और अग्नि सुरक्षा जागरूकता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने नगर निगम द्वारा जारी निर्देशों के साथ पीजीआई इंजीनियरिंग अधिकारियों की गैर-अनुपालना पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि यह बहुत निराशाजनक है कि निगम के अग्निशमन एवं बचाव सेवा विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान कई विसंगतियां पाई गईं और पीजीआई अधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन कुछ नहीं किया गया। यहां तक कि पीजीआई अधिकारियों ने अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त करने की भी जहमत नहीं उठाई। बैठक में सलाहकार राजीव वर्मा, गृह सचिव नितिन यादव, आयुक्त आनिंदिता मित्रा, पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल व अन्य उपस्थित रहे।
बाहरी विशेषज्ञों से अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश
पीजीआई अधिकारियों ने पीजीआई परिसर के अंदर कुल 17 इमारतों में से केवल एक इमारत के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। पीजीआई के इंजीनियरिंग विभाग ने 2021 में प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद सेक्टर- 11 फायर स्टेशन के अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा संहिता के अनुसार अग्नि सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा था। विभाग ने पीजीआई के संबंधित अधिकारियों को कई रिमाइंडर भेजे, लेकिन उसका भी कोई लाभ नहीं हुआ। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों को साथ मिलकर हर दो महीने में एक समीक्षा बैठक करनी चाहिए। उन्होंने पीजीआई अधिकारियों को जनता के हित में तत्काल कार्रवाई करने, युद्धस्तर पर खामियों की पहचान करने और उन्हें सुधारने के लिए बाहरी विशेषज्ञों द्वारा अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश दिया।