शहर की लाइफलाइन सुखना को बचाने के लिए प्रशासन ने पहल कर दी है। शुक्रवार शाम हुई बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन ने सूखती सुखना को बचाने के लिए तीन मोर्चों पर काम करने का फैसला लिया है। पहला सुखना से गाद निकालने का, दूसरा बरसाती पानी के रास्तों को साफ करना और तीसरा तकनीकी विशेषज्ञ नियुक्त करने का। प्रशासन का कहना है कि इस बार सुखना ज्यादा सूख गई है, इसलिए गाद निकालने का अच्छा मौका है।
अमर उजाला ने मंगलवार के अंक में सुखना में गाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया कि सुखना के जीवित रहने के लिए गाद का निकालना कितना महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सुखना के संरक्षण के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक के बाद गृह सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि बैठक में यह फैसला लिया गया कि सुखना से लगते पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के हिस्से में पानी का विकल्प तलाशा जाए।
जितने भी पानी के चैनल ब्लॉक पड़े है, उनमें सफाई करवा पानी को सुखना तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए पंजाब व हरियाणा सरकार की भी मदद ली जाएगी। इसके अलावा बरसाती पानी की एक एक बूंद को सुखना तक पहुंचाने के लिए हर संभव व्यवस्थित ढंग से चैनल तैयार किया जाएगा। गृह सचिव ने कहा कि सुखना में से गाद और वीड निकालने का भी फैसला लिया गया।
इस समय सुखना जहां सूखी हुई है, प्रशासन वहां से गाद निक ालने चल रहा है। इसके अलावा सुखना के संरक्षण को लेकर लोगों की राय और तकनीकी विशेषज्ञ नियुक्त करने पर भी सलाह ली गई। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पंजाब व हरियाणा के अर्बन लोकल बॉडीज और पर्यावरण विभाग के भी अधिकारी मौजूद रहे।