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EV Policy: भड़के मेयर बोले-नीति में संशोधन नहीं हुआ तो चंडीगढ़ में नहीं घुसने देंगे पेट्रोल-डीजल गाड़ियां

Sat, 24 Jun 2023 02:24 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

ईवी नीति को लेकर मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि कुछ महीने पहले जब सीवरेज सेस कम करने की बात हुई तो अधिकारी अन्य राज्यों से तुलना करने लगे, लेकिन जब इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाई गई तो अन्य राज्यों में क्यों नहीं देखा गया। प्रशासन को नीति में संशोधन करना चाहिए।
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फोरम को संबोधित करते मेयर अनूप गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ईवी नीति के तहत जुलाई के पहले हफ्ते में चंडीगढ़ में पेट्रोल बाइक बंद हो जाएंगी। इसे लेकर मेयर अनूप गुप्ता ने शुक्रवार को सेक्टर-31 स्थित पीएचडी चेंबर से प्रशासन के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। मेयर ने मंच से कहा है कि प्रशासन के अधिकारी अगर ईवी नीति में संशोधन नहीं करेंगे तो वह अन्य लोगों के साथ चंडीगढ़ की सीमा पर धरने पर बैठेंगे और पेट्रोल-डीजल की बाकी गाड़ियों को भी चंडीगढ़ में घुसने नहीं देंगे। 

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शहर में पहली बार हुआ है, जब कई व्यापारिक, औद्योगिक और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन एक मंच पर आए हैं और उन्होंने एक ज्वाइंट फोरम बनाया है। इसी फोरम के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को पीएचडी चेंबर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य अतिथि के तौर पर मेयर अनूप गुप्ता पहुंचे। विभिन्न एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आ रही समस्याओं को लेकर मेयर को ज्ञापन दिया। ईवी नीति, शेयर अनुसार संपत्तियों की खरीद-बिक्री समेत तमाम मुद्दों को लेकर मेयर से जवाब भी मांगा गया। 

ईवी नीति को लेकर मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि कुछ महीने पहले जब सीवरेज सेस कम करने की बात हुई तो अधिकारी अन्य राज्यों से तुलना करने लगे, लेकिन जब इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाई गई तो अन्य राज्यों में क्यों नहीं देखा गया। प्रशासन को नीति में संशोधन करना चाहिए, क्योंकि एक साल में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक प्रशासन नहीं बना पाया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ चंडीगढ़ के लोगों से ईवी चलवाने से क्या फायदा होगा, जब पड़ोसी राज्यों से लाखों की संख्या में गाड़ियां चंडीगढ़ में आती हैं। 
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मेयर ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह लोगों के साथ सड़कों पर उतरने से भी गुरेज नहीं करेंगे। ईवी नीति में संशोधन नहीं हुआ तो वह चंडीगढ़ की सीमा पर भी बैठेंगे और मोहाली-पंचकूला से आने वाली पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को चंडीगढ़ में नहीं घुसने देंगे।

ये है मांग
ईवी नीति के तहत नॉन-इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तय किए गए कोटे की व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
मेयर ने प्रशासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कहा कि जब-जब ऐसे फरमान जारी होते हैं, तो ऐसा लगता है कि चंडीगढ़ एक अलोकतांत्रिक शहर बन गया है। शेयर अनुसार संपत्तियों की खरीद-बिक्री के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सेक्टर-31 से ऊपर के सेक्टरों की खरीद-बिक्री तुरंत शुरू होनी चाहिए। मिसयूज और पेनल्टी के नोटिस को लेकर कहा कि जब किसी चीज के रेट बढ़ाने होते हैं तो प्रशासन को मंत्रालय की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन जब रेट घटाने की बात आती है, तो मंत्रालय की बात कहने लगते हैं। 

मेयर ने कहा कि कभी चंडीगढ़ में वर्ल्ड कप के मैच होते थे, आज शहर क्रिकेट के नक्शे में भी नहीं है। किसी जमाने में चंडीगढ़ से सेब की मंडी चलती थी, लेकिन ऐसे ही आदेशों की वजह से वह मंडी बाहर जा चुकी है। यह सब देखकर दुख होता है। तंज कसते हुए मेयर ने कहा कि डेपुटेशन पर आए अधिकारी ऐसे नियम बना देते हैं, जिससे उनके राज्य के लोग तो दुखी नहीं होते लेकिन चंडीगढ़ के लोग परेशान होते रहते हैं।

करने और मरने की स्थिति में पहुंचेः रंजीव दहूजा
चंडीगढ़ ऑटोमोबाइल्स एसोसिएशन के रंजीव दहूजा ने कहा कि ईवी नीति के अनुसार जुलाई के पहले हफ्ते में पेट्रोल बाइक्स बंद हो जाएंगी। डीलरों के लिए करने और मरने जैसी स्थिति है। देश के 26 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में ईवी नीति है लेकिन सिर्फ एक चंडीगढ़ है, जहां प्रशासन ने गाड़ियों की संख्या पर अंकुश लगाया है। उन्होंने टारगेट हटाने की मांग की। बताया कि शहर में करीब 50 डीलर हैं जहां पर 5000 से 6000 कर्मचारी काम करते हैं। उनके परिवार समेत 25 से 30 हजार लोग जुड़े हुए हैं। 

शेयर अनुसार संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर लगी रोक को लेकर हरपाल सिंह ने कहा कि प्रशासन ने पूरे शहर में यह गैरकानूनी तरीके से बंद किया है। वह सभी प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कारोबारी जगदीश अरोड़ा ने कलेक्टर रेट कम करने की बात कही। व्यापारी नरेश गर्ग ने कहा कि इंडस्ट्रियल एरिया में बी-टू-बी के साथ बी-टू-सी की मंजूरी को लेकर जल्द नोटिफिकेशन होनी चाहिए।

आगे क्या बढ़ेंगे, पुरानी गलतियां ही ठीक नहीं हो रहीं: नवीन मंगलानी
उद्योगपति नवीन मंगलानी ने कहा कि शहर का उद्योग आगे क्या बढ़ेगा, अभी तो पुरानी गलतियां ही ठीक नहीं हो रही हैं। वह कई साल से रट रहे हैं लेकिन प्रशासन को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। कहा कि 18 मई को यूटी सचिवालय में एक ओपन हाउस डिस्कशन हुआ। अधिकारियों ने भरी सभा में वादा किया था कि जल्द ही मिनट्स ऑफ मिनट्स जारी होंगे लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी इंतजार है। उन्होंने लीज होल्ड से फ्री होल्ड, एमएसएमई एक्ट, मिसयूज और वायलेशन के नोटिस का मुद्दा उठाया। उदाहरण देते हुए कहा कि इंडस्ट्रियल एरिया के एक समान प्लॉट में प्रशासन की मंजूरी से शराब का ठेका चल सकता है लेकिन अगर कोई अपना बनाया हुआ फर्नीचर बेच देता है तो वह मिसयूज में गिना जाता है। ये कैसे नियम बना दिए गए हैं।

बूथ पर फर्स्ट फ्लोर की अनुमति मिले, फायर के नोटिस बंद हों: चरणजीव सिंह
व्यापारी चरणजीव सिंह ने पुराने वैट के मामलों को हल करने के लिए पंजाब की तर्ज पर वन टाइम सेटलमेंट की मांग की। इसके अलावा कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने, एससीएफ से एससीओ में बदलने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पहले करीब 5.70 लाख रुपये लगते थे, लेकिन अब 60 से 70 लाख रुपये लग रहे हैं। कोई व्यक्ति अपनी ही संपत्ति को कन्वर्ट करने के लिए इतने रुपये क्यों दें। यह गलत है। ये रेट कम होना चाहिए। उन्होंने बूथ पर फर्स्ट फ्लोर की अनुमति देने, फायर सेफ्टी नोटिस का मुद्दा भी उठाया। कारोबारी अवि भसीन ने कहा कि प्रशासन लोगों को तंग कर रहा है। चंडीगढ़ में काम करना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से शहर ईज ऑफ डूइंग में नीचे जा रहा है।

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