चंडीगढ़ प्रशासन के दिशा-निर्देश से रामलीला कमेटियां डर गई हैं। इस डर के कारण रामलीला कमेटियों ने रामलीला मंचन न करने का फैसला किया है। अभी तक प्रशासन ने रामलीला मंचन की अनुमति भी नहीं दी है।
चंडीगढ़ केंद्रीय रामलीला महासभा की गढ़वाल भवन में हुई बैठक में 15 रामलीला कमेटियां पहुंचीं। महासभा की बैठक में बताया गया कि प्रशासन के आदेश के अनुसार जरा-सी भी लापरवाही हुई तो जेल होगी। इस पर कमेटियां डर गई हैं। इस पर 15 में से 13 रामलीला कमेटियों ने रामलीला मंचन न करने का फैसला लिया है।'
महासभा के प्रधान बीपी गौड़ ने कहा कि महासभा के साथ अभी 21 रामलीला कमेटियां जुड़ी हैं। नगर निगम आयुक्त कार्यालय में 35 रामलीला कमेटियों की फाइल रामलीला मंचन के लिए मैदान की अनुमति देने के लिए पहुंची है। आयुक्त कार्यालय इसके लिए उपायुक्त कार्यालय के आदेश के इंतजार में है।
अजब नियम.. कलाकार को कोरोना हुआ तो प्रधान व महासचिव पर केस
बीपी गौड़ ने बताया कि प्रशासन के दिशा-निर्देश इतने कठिन हैं कि यदि कलाकार या मेकअप रूम में किसी को भी कोरोना हुआ तो कमेटी के प्रधान और महासचिव पर मामला दर्ज होगा और जमानत भी नहीं होगी। यही नहीं, प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि दर्शकों के लिए कुर्सियों की दूरी छह फीट की होगी।
यदि उसके बीच में कोई भी आकर बैठ गया तो कमेटी और महासभा पर मामला दर्ज होगा। रामलीला मैदान को पूरी तरह से घेरा होना चाहिए और केवल एक ही गेट होना चाहिए। ग्राउंड से लेकर मंच और मेकअप रूम को सैनिटाइज करना होगा।
15 को प्रशासन रामलीला मंचन पर लेगा फैसला, होने के आसार कम
बीपी गौड़ का कहना है कि नवारत्र 17 अक्तूबर से शुरू है। पांच दिन पहले से ही स्टेज पर टेंट लगाने का काम शुरू हो जाता था, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिलने से रामलीला का मंचन होने के आसार कम ही हैं। 15 अक्तूबर को प्रशासन फैसला करेगा कि रामलीला कमेटी को अनुमति मिलेगी या नहीं।