निजी स्कूलों की ओर से मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के रवैये पर यूटी प्रशासन शिकंजा कसने जा रहा है। फीस मामले में सुनवाई के दौरान प्रशासन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब में फीस बढ़ोतरी को लेकर जो एक्ट बनाया गया है, उसे यूटी प्रशासन अपनाने जा रहा है। एक्ट में परिवर्तन और मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा गया है। इस पर निजी अनएडेड स्कूलों की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय दिए जाने की अपील की गई।
स्कूलों की अपील पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को 2 मई तक के लिए टाल दिया। निजी स्कूलों की ओर से मनमाने ढंग से फीस बढ़ोतरी और व्यावसायिक संस्थानों की तरह अकादमी चलानेे के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। एडवोकेट रितेश पांडेय ने हाईकोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में कोई फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी नहीं होने के चलते सीबीएसई मान्यता प्राप्त कई निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश पर हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल्स में संशोधन कर स्कूलों की फीस को निर्धारित करने के लिए डिवीजन स्तर पर डिवीजनल कमिश्नर के अधीन एक कमेटी का गठन कर इसकी 28 जनवरी 2014 को नोटिफिकेशन भी कर दी थी।
ठीक इसी तर्ज पर पंजाब सरकार ने भी पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीच्यूशनल एक्ट-2016 की गत वर्ष दिसंबर माह में नोटिफिकेशन कर दी है, जिसके तहत डिवीजन स्तर पर डिवीजनल कमिश्नर के अधीन कमेटी का गठन किया गया है, जो निजी स्कूलों की ओर से मनमाने ढंग से बढ़ाए जाने वाली फीस के खिलाफ छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सुनेगी। चंडीगढ़ प्रशासन ने अभी तक पंजाब की तर्ज पर ऐसी कोई कमेटी का गठन ही नहीं किया है, जो निजी स्कूलों की ओर से बढ़ाई जा रही फीस के खिलाफ शिकायतें सुनकर उनका निपटारा कर सकें।