चंडीगढ़। कोटक बैंक की ओर से बिना सूचना दिए खाता बंद करने पर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 की महिला को मैटरनिटी योजना के तहत 3 हजार रुपये नहीं मिल सके। उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में 1326 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने और 10 हजार रुपये मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च देने के आदेश दिए हैं। पिंकी चौहान ने आयोग को बताया कि उसने फरवरी 2019 में पीएमएमवीवाई योजना के तहत ऑनलाइन खुलवाया था। इसके बाद बैंक ने बताया कि केवाईसी पूरी हो गई है और खाता चालू हो गया है। 6 जुलाई और 26 अगस्त 2019 को उसके खाते से 1000 रुपये और 2000 रुपये का लेनदेन हुआ था लेकिन 5 अप्रैल 2020 को खाता बंद होने के कारण एक ऑनलाइन लेन-देन बंद कर दिया गया। बैंक ने बिना किसी सूचना के खाता बंद कर दिया। उस समय कोरोना काल के चलते शिकायतकर्ता बैंक से मिल भी नहीं सकी। इसके बाद उसने खाते को दोबारा चालू करने के लिए कई बार अनुरोध किया लेकिन कोई समाधान निकलकर सामने नहीं आया। बैंक ने उसे केवल 1326 रुपए वापस लौटाने की बात कही परंतु कोई पैसा नहीं भेजा। इसके बाद उसने परेशान होकर उपभोक्ता आयोग में बैंक के खिलाफ केस दर्ज किया। वहीं बैंक ने भी शिकायतकर्ता के विरोध में बताया कि खाता केवाईसी सत्यापन की अनुपालन न होने के कारण बंद किया गया था। ग्राहक की ओर से आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कहा कि बैंक को खाते के बची हुई राशि का भुगतान किए बिना खाता बंद नहीं करना चाहिए था इसलिए उन्होंने शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाते हुए उसके पैसे बैंक द्वारा रिफंड कराने और साथ में मुआवजा देने का आदेश दिया।