केंद्र सरकार ने अबोहर हत्याकांड के पीड़ित परिवारों को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की एकल बेंच ने वीरवार को पंजाब पुलिस को पीड़ितों की सुरक्षा के निर्देश जारी किए। इसके अलावा पीड़ित परिवारों को छूट दी है कि सुरक्षा को लेकर कोई शिकायत होने पर वे दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
अबोहर में मारे गए दलित युवक भीम टांक और घायल गुरजंट सिंह के परिवार ने बुधवार को याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि जो लोग हाथ पैर काट सकते हैं, उनके लिए हत्या करना बड़ी बात नहीं है।
टांक की मां कौशल्या, पिता कपूर चंद के अलावा घायल गुरजंट सिंह के भाई रंजीत सिंह ने आरोपियों से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इस पर बेंच ने केंद्र और पंजाब सरकार के वकीलों से पूछा था कि वह अपनी सरकारों से सुरक्षा की हिदायत लेकर वीरवार तक जवाब दें।
केंद्र और राज्य सरकार का जवाब
केंद्र की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल चेतन मित्तल ने बेंच को बताया कि अति संवेदनशील मामलों में ही केंद्रीय सुरक्षा बल की सुविधा मुहैया कराने पर विचार होता है। वैसे भी राज्य सरकार सुरक्षा मुहैया कराने को तैयार है। उनसे पहले पंजाब के सरकारी वकील ने बेंच को बताया कि दो सुरक्षाकर्मी पहले से मुहैया कराए जा चुके हैं।
‘पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं’
पीड़ित परिवारों की ओर से एडवोकेट एसपीएस टीना ने बेंच को अवगत कराया कि उनका पंजाब पुलिस से भरोसा उठ चुका है, इसीलिए केंद्रीय सुरक्षा बल की मांग की गई थी। पंजाब सरकार जिन सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की बात कह रही है, वह केवल दौरा कर चले जाते हैं। यही नहीं, घटना का मुख्य आरोपी शिवलाल डोडा पुलिस की मौजूदगी में भीम टांक के घर गया और वहां उसके परिवार पर समझौते का दबाव बनाया।
ऐसे में पंजाब पुलिस की सुरक्षा पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। बेंच ने कहा कि इस स्तर पर फिलहाल केंद्रीय सुरक्षा की जरूरत नहीं है। पंजाब पुलिस 24 घंटे सुरक्षा मुहैया कराएगी और यदि इसमें कोई कोताही दिखती है तो पीड़ित दोबारा हाईकोर्ट आ सकते हैं।