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Chandigarh: पीजीआई ने बनाया वेंटिलेटर को टक्कर देने वाला ABC डिवाइस, पेटेंट के बाद बाजार में उतारने की तैयारी

Thu, 11 Jul 2024 07:17 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई की तरफ से वेंटिलेटर की कमी को दूर करने के लिए आर्टिफिशियल ब्रिदिंग कैपेबिलिटी डिवाइस को बनाने का निर्णय लिया गया। इसमें वे सारे फीचर शामिल किए गए, जो एक गंभीर मरीज की जान बचाने के लिए वेंटिलेटर में होते हैं।
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आर्टिफिशियल ब्रिदिंग कैपेबिलिटी डिवाइस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ पीजीआई ने तकनीक में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। बायो मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइस लैब में संस्थान के विशेषज्ञों ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो वेंटिलेटर को टक्कर दे रही है। इसे आर्टिफिशियल ब्रिदिंग कैपेबिलिटी डिवाइस (एबीसीडी) नाम दिया गया है। डिवाइस के क्लीनिक ट्रायल पूरा होने और पेटेंट मिलने के बाद अब संस्थान एक निजी कंपनी के साथ मिलकर बाजार में उतारने की तैयारी में है।

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बायो मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइस लैब के प्रभारी एवं एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के डॉ. जोसफ एल मैथ्यू ने बताया कि यह डिवाइस बेहद कारगर है। इस पर 2018 में काम शुरू किया गया था। क्लीनिक ट्रायल की सफलता और पेटेंट के बाद एक निजी कंपनी को निर्माण के लिए दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द डिवाइस मार्केट में उपलब्ध होगी। 
 

20 लाख की मशीन का तोड़ महज 60 हजार में 

इस डिवाइस की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आएगा जबकि एक वेंटिलेटर 20 से 25 लाख रुपये में खरीदा जाता है। डॉ. मैथ्यू ने बताया कि डिवाइस में वेंटिलेटर के सभी मानकों को पूरा नहीं किया गया है, लेकिन वे सभी आवश्यक मानक शामिल हैं, जिससे इमरजेंसी में गंभीर मरीज की जान बचाई जा सके।

अंबू बैग की नहीं होगी जरूरत 

इस डिवाइस के आ जाने के बाद वेंटिलेटर की कमी की स्थिति में कर्मचारी या मरीज के परिजन को अंबू बैग दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ. मैथ्यू ने बताया कि डिवाइस को इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम से लैस किया गया है, जिसकी मदद से सेंसर की रीडिंग के आधार पर मशीन को कमांड दिया जा सकता है। इसे बच्चों और बड़ों के साथ फेफड़े की गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति व ट्रॉमा केस में भी उपयोग किया जा सकता है। प्रेशर सेट करने के बाद उसे अलॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे असंतुलन होने पर तत्काल उसकी सूचना मिल सके। इसके साथ मरीज की स्थिति गंभीर होने पर भी अलॉर्म बजेगा।

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