चंडीगढ़। नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध समिति (एफएंडसीसी) ने कुत्तों की गणना करने और टीकाकरण प्रबंधन में सुधार के लिए लावारिस कुत्तों में माइक्रो-चिपिंग के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है। इसके लिए चार लाख रुपये से 1000 माइक्रोचिप्स, एप्लीकेटर और एक रीडर खरीदा जाएगा। चिप के लगाने के बाद लावारिस कुत्ते का रंग, ब्रीड, एरिया, कब-कब स्टरलाइजेशन आदि की जानकारी मिल जाएगी।
एफएंडसीसी की बैठक मेयर कुलदीप कुमार की अध्यक्षता में हुई, जिसमें आयुक्त आनिंदिता मित्रा व समिति के अन्य सदस्यों में जसविंदर कौर, लखबीर सिंह, राम चंदर यादव, तरुणा मेहता के अलावा निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समिति ने शिक्षा विभाग को स्कूल के लिए चार एकड़ जमीन 21.44 लाख रुपये मासिक किराए पर देने और शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर (यूएएएम) के निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के बीच इंदिरा कॉलोनी में 0.3 एकड़ भूमि पर 99 वर्षों के लिए दो लाख रुपये मासिक किराए पर ली जाने वाली लीज डीड की शर्तों पर चर्चा की। समिति ने चर्चा और अनुमोदन के लिए अगली जनरल हाउस मीटिंग में नियम और शर्तें प्रस्तुत करने की सिफारिश की। समिति ने हर साल एक जनवरी से 31 दिसंबर तक ई-नीलामी के माध्यम से हाउसिंग बोर्ड, मनीमाजरा, सर्कस ग्राउंड सेक्टर-17 और प्रदर्शनी ग्राउंड सेक्टर-34 जैसे वाणिज्यिक मैदानों की बुकिंग के लिए दरों, नीति दिशा-निर्देशों व नियमों और शर्तों के बारे में एजेंडे पर चर्चा की। समिति के सदस्यों ने सिफारिश की है कि विस्तृत नियम और शर्तें चर्चा और अंतिम अनुमोदन के लिए अगली जनरल हाउस मीटिंग से पहले प्रस्तुत की जाएं।
माइक्रो चिप हो सकती है अनिवार्य
शहर में बहुत से लोगों ने कुत्ते पाल रखे हैं। नगर निगम के अधिकारियों की शिकायत रहती है कि जब कुत्ता अपनी उम्र पूरी करने वाला होता है तो उसे सड़क पर छोड़ दिया जाता है। वह नगर निगम की जिम्मेदारी बन जाता है। इस वजह से भी शहर में हर साल कुत्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। अगर कुत्ते के अंदर माइक्रो चिप होगी तो स्कैन कर उसके मालिक का नाम, नंबर, पता समेत सभी तरह की जानकारी मिल जाएगी। ऐसे में इस समस्या से भी निजात मिल सकती है। इसका लाभ कुत्ते के खोने पर भी मिलता है। अगर वे कभी लापता हो जाते हैं तो उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने और सुरक्षित रूप से मालिक के पास लौटने में भी सहायता होती है। स्कैन करते ही तुरंत पता लग जाएगा कि कुत्ता किसका है। अगर ये प्रयोग सफल रहा तो पालतू कुत्तों के लिए माइक्रो चिप अनिवार्य हो सकती है।
समिति के सदस्यों ने इन एजेंडों को दी मंजूरी
- 16.55 लाख रुपये से सेक्टर 37-डी में सार्वजनिक शौचालय ब्लॉक की मरम्मत।
- 12.70 लाख रुपये से सेक्टर-56 में सामुदायिक केंद्र के पास ग्रीन बेल्ट में टो-वॉल का निर्माण।
- फेज-1 में औद्योगिक क्षेत्र में श्मशान घाट पर विद्युत प्रतिष्ठानों की विशेष मरम्मत, जिसकी अनुमानित लागत 12.91 लाख रुपये है।
- 9.45 लाख रुपये की अनुमानित लागत से सेक्टर-7 और 8 के पार्कों का विकास।
- सेक्टर-11 में बूथ मार्केट में 12.61 लाख रुपये की अनुमानित लागत से सीवरेज प्रणाली को मजबूत करना।
- 23.09 लाख रुपये से सेक्टर-30 सी एंड डी मार्केट में सजावटी लाइट सिस्टम उपलब्ध कराना।
- 13.78 लाख रुपये से धनास और सारंगपुर के पुनर्वास कॉलोनी में सामुदायिक केंद्र में दुल्हन के लिए फर्नीचर, कुर्सी और पोडियम उपलब्ध कराना।
- 15.07 लाख रुपये से सेक्टर-17 में डीसी ऑफिस और स्मार्ट सिटी पार्किंग में स्ट्रीट लाइट सिस्टम का विस्तार।
- 17.75 लाख रुपये से सेक्टर-9 में वी4 रोड और 29.33 लाख से फेज-1 के औद्योगिक क्षेत्र में एलांते मॉल के सामने और पीछे की ओर की सड़क पर स्ट्रीट लाइट।
- 5.74 लाख रुपये से मिल्क कॉलोनी के सामुदायिक केंद्र में जिम उपकरण उपलब्ध कराना और उन्हें ठीक करना।
- जीएमएसएसएस-35 के पीछे मौजूदा क्षतिग्रस्त टाइल को हटाने के बाद सीमेंट कंक्रीट फर्श उपलब्ध कराना।
- धनास और सारंगपुर के विभिन्न सामुदायिक केंद्रों में वाटर कॉलर और आरओ उपलब्ध कराना और ठीक करना, जिसकी अनुमानित लागत 3.63 लाख रुपये।
- गोशाला मलोया में प्लांटर्स का निर्माण, जिसकी अनुमानित लागत 12.25 लाख रुपये।
- 19.31 लाख रुपये से सेक्टर 30 बी में विभिन्न पार्कों के चारों ओर पीसीसी टाइलों को हटाने के बाद पेवर ब्लॉक लगाना।
- 41.26 लाख से बुड़ैल गांव में 80 मिमी मोटे पेवर ब्लॉक का उपयोग कर केशोराम कांप्लेक्स की गलियों का पुनर्निर्माण।
- 42.39 लाख रुपये की अनुमानित लागत से गांव खुड्डा जस्सू और खुड्डा लाहौरा की फिरनी सड़क पर 60 मिमी टिक इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक लगाना।