श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के प्रवक्ता जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि मठ के त्रिदंडी स्वामी वामन महाराज ने प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले प्रभुपाद ने विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी शहर में सन 1874 में श्री भक्ति विनोद ठाकुर घर में जन्म लिया।
उनके पिता भक्त विनोद ठाकुर तत्कालीन सरकार में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे। बालक का नाम विमल प्रसाद रखा गया। यह बचपन से ही अति कुशाग्र बुद्धि थे। सात साल के उम्र में ही उन्हें पूरी भागवत गीता पूरी तरह से कंठस्थ कर ली। बाल्यावस्था से ही उन्हें धार्मिक ग्रंथ और धार्मिक विचारों में बहुत अधिक रुचि थी। इसके बावजूद भी उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्हें अंग्रेजी, बंगाली, ओड़िया भाषा पर पूरी तरह से उनकी पकड़ थी। वह अपने समय के ज्योतिष विद्या के प्रख्यात विद्वान माने जाते थे।
64 गौड़ीय मठों की स्थापना की :
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद भी उन्होंने अपने समय के श्रेष्ठ शुद्ध कृष्ण भक्त लेकिन निरक्षर गौर किशोर दास बाबा से हरि नाम दीक्षा प्राप्त की। उन्होंने 100 करोड़ निरंतर हरि नाम का जाप करने के बाद 64 गौड़ीय मठों की स्थापना कर जाति धर्म का भेदभाव किए बिना पूरे दुनिया में हरे कृष्णा शुद्ध कृष्ण भक्ति का संदेश पहुंचाया। कार्यक्रम में मठ से जुड़े श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।