आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान ने केंद्र पर कृषि कानूनों के खिलाफ अड़ियल रवैया अपनाए जाने का आरोप लगाया है। मान ने कृषि कानूनों को रद्द करने की मोदी सरकार से अपील करते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाकर फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद को कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग की है।
मान ने लोकसभा अध्यक्ष को सत्र बुलाने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि केंद्र के कारण लाखों आंदोलनकारी किसान सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं और अनहोनी के कारण मौतें भी होने लगी हैं। शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान मान ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिख कर विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।
आप के राज्यसभा के सदस्यों ने भी विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, क्योंकि मसले का एक मात्र समाधान एमएसपी पर खरीद को कानूनी गारंटी और काले कानूनों को रद्द करना ही है। भगवंत मान ने कहा कि सरकार किसान नेताओं के साथ सात-सात घंटे बैठकें करके मसले को लटका रही है। यदि सरकार की नीयत खोटी न होती तो यह मसला सिर्फ साढ़े सात मिनट में हल किया जा सकता है। यदि जीएसटी के समय संसद रात को खुल सकती है तो अब इन काले कानूनों को रद्द करने के लिए भी खुल सकती है।
शाह और कैप्टन की मुलाकात संदेहास्पद: आप
किसानों की बैठक से पहले कैप्टन और अमित शाह की अकेले में हुई मुलाकात संदेहास्पद है। कैप्टन अचानक दिल्ली आए और सिर्फ अमित शाह के दरबार में हाजिरी लगवा कर चले गए, न आंदोलनकारी किसानों के पास आए और न ही अपने हाईकमान को मिले। यहां तक कि बैठक के उपरांत मीडिया के सामने बेहद कमजोर स्टैंड रखा। यदि नीयत साफ होती तो कैप्टन न केवल विरोधी दलों बल्कि दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाते।