सात सांसदों के जाने का बड़ा झटका झेल रही आम आदमी पार्टी पंजाब में आगामी रणनीति बनाने में जुट गई है। इसके तहत डैमेज कंट्रोल के साथ-साथ मतदाताओं के बीच बगावत को भुनाने की तैयारी की जा रही है मगर इसमें मुख्य एजेंडा विकास की बात से भटका नहीं जाएगा।
पंजाब विधानसभा चुनाव 2007 से पहले आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों को तोड़कर भाजपा ने आप को असहज कर दिया है। भाजपा में शामिल हुए सांसदों में बड़े उद्योगपति भी शामिल हैं जिससे आप के उद्योग वर्ग में पैठ बनाने के प्रयासों को झटका लगा है क्योंकि पिछले कुछ समय से पंजाब में आप उद्योग समर्पित नीतियां के जरिये अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी थी।
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आप सरकार पिछले समय के दौरान उद्योग वर्ग के लिए तमाम बड़ी नीतियां लेकर आई क्योंकि लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा समेत कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्योग वर्ग का विशेष दबदबा रहता है।
नई औद्योगिक नीति जारी की और बड़े औद्योगिक घरानों से जुड़े उद्योगपतियों और कारोबारियों की महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति की गई। कारोबारी संजीव अरोड़ा की विधानसभा में एंट्री करवाने के बाद उन्हें मंत्री भी बनाया गया।
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इन सब के बावजूद अब सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने से आप के इन सभी प्रयासों को झटका लगा है क्योंकि इन सांसदों में तीन बड़े उद्योगपति और कारोबारी शामिल हैं।
आप सांसदों के शामिल होने से अब पंजाब से राज्यसभा में भाजपा का कद बढ़ गया है। वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रदेश में कोई सीट नहीं जीत पाई थी जबकि उससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दो सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
बगावत के बाद आगामी रणनीति बनाने में जुटी पार्टी
सात सांसदों के जाने का बड़ा झटका झेल रही आम आदमी पार्टी पंजाब में आगामी रणनीति बनाने में जुट गई है। इसके तहत डैमेज कंट्रोल के साथ-साथ मतदाताओं के बीच बगावत को भुनाने की तैयारी की जा रही है मगर इसमें मुख्य एजेंडा विकास की बात से भटका नहीं जाएगा।
आप के नेताओं के निशाने पर मुख्य रूप से भाजपा और बागी नेता भी रहेंगे। चूंकि भाजपा अन्य नेताओं के भी संपर्क में होने का दावा कर रही है लिहाजा पंजाब में पार्टी के विधायकों, मंत्रियों व अन्य नेताओं को एकजुट रखने की जिम्मेदारी सीएम भगवंत सिंह मान और प्रभारी मनीष सिसोदिया को सौंपी गई है।
हालांकि सीएम मान का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद से उन्हें पंजाब से बहुत कार्यकर्ताओं, नेताओं व आम लोगों के फोन आ रहे हैं जिनमें उन्होंने आप के साथ डटकर खड़े रहने की बात कही है।
इसके अलावा सभी मंत्रियों को स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं का हौसला बनाकर रखने और उनसे कनेक्ट बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं क्योंकि बागी हुए सांसदों में से राघव चड्डा और संदीप पाठक आप के लिए बड़ी सिरदर्दी बन सकते हैं।
ये दोनों पंजाब में आप की सियासत के बड़े सूत्रधारों में से एक हैं। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे राघव ने पंजाब में आप को वित्तीय रूप से मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई थी जबकि संदीप पाठक ने पिछले चुनाव में हर विधानसभा सीट पर आप को संगठनात्मक मजबूती देने का काम किया था।
वादे लेकर जनता की बीच जाएगी आप
सत्ता में आने के बाद आप सरकार ने पंजाब में साढ़े चार साल खूब मेहनत की। सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं में खासकर 300 यूनिट बिजली फ्री, हर परिवार को सालाना 10 लाख तक कैशलेस इलाज, निशुल्क शिक्षा, महिलाओं के लिए निशुल्क सफर, हर महिला को मासिक वित्तीय सहायता, आखिरी टेल तक सिंचाई के लिए नहरी पानी, 44 हजार करोड़ से लिंक रोड निर्माण योजना, इन्वेस्ट पंजाब समेत विभिन्न प्रोजेक्ट शामिल हैं।
आप ने साल 2027 का विधानसभा चुनाव इन्हीं विकास संबंधी परियोजनाओं के दम पर ही लड़ना है लेकिन उससे पहले आप को अपनों की बगावत का झटका लग गया। सीएम कहते हैं कि आप सूबे को रंगला पंजाब बनाना चाहती है मगर भाजपा को यह सहन नहीं हो रहा है।
पार्टी अपने पूरे किए गए वादों को लेकर ही जनता के बीच जाएगी और ऐसे मसलों पर भटकेगी नहीं। बागी नेताओं की बात भी जनता के बीच की जाएगी, जिन्हें सबक पंजाब ही सिखाएंगे।