चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने धनशोधन निवारण अधिनियम में महिलाओं को जमानत से जुड़ी बड़ी राहत को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि पीएमएलए की धारा 45(1) के प्रावधान में दी गई महिला संबंधी छूट सभी महिलाओं पर समान रूप से लागू होगी। महिला कितनी पढ़ी-लिखी है, उसका पेशा क्या है, सामाजिक हैसियत कितनी ऊंची है या वह किसी महत्वपूर्ण पद पर है, इन आधारों पर उसे इस कानूनी छूट से बाहर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस सुमित गोयल ने यह टिप्पणी करीब 25 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी कॉल सेंटर से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपी सुरभि को नियमित जमानत देते हुए की। अदालत ने कहा कि कानून में जब महिला शब्द का इस्तेमाल बिना किसी अपवाद या शर्त के किया गया है तो अदालत अपनी ओर से महिलाओं की अलग-अलग श्रेणियां बनाकर कुछ को इस छूट से बाहर नहीं कर सकती। पीएमएलए की धारा 45 के तहत अपराध गैर-जमानती हैं और सामान्य तौर पर जमानत के लिए दो कड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहली, सरकारी वकील को जमानत का विरोध करने का अवसर दिया जाए। दूसरी, यदि सरकारी वकील विरोध करता है तो अदालत को यह संतुष्ट होना होता है कि आरोपी के दोषी न होने के पर्याप्त आधार हैं और जमानत पर बाहर आने के बाद उसके दोबारा अपराध करने की आशंका नहीं है।
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतर भी स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि महिला होने के कारण पीएमएलए की धारा 45 की दोहरी शर्तों का कठोर बंधन हट जाता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि महिला आरोपी को स्वत: या बिना किसी शर्त के जमानत मिल जाएगी। मामला प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज धनशोधन मामले से जुड़ा था। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी सुरभि कथित तौर पर एक कंपनी की वास्तविक मालिक और नियंत्रक थी। इस कंपनी का इस्तेमाल अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाने वाले संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी कॉल सेंटर को चलाने में किए जाने का आरोप था।
ईडी का आरोप था कि जून 2024 से अगस्त 2025 के बीच करीब 25 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित रकम जुटाई गई। यह रकम हवाला माध्यमों से भारत पहुंचाई गई और कथित तौर पर आरोपी के अपने खातों के अलावा परिवार के सदस्यों तथा अन्य लोगों के खातों के जरिए घुमाई गई। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि रकम को बाद में चल और अचल संपत्तियों में लगाया गया।