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Chandigarh News: पेड़ों का कब्रिस्तान बना हर-भरा जंगल... प्रशासक कटारिया देखकर रह गए दंग

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चंडीगढ़। कैंबवाला रोड पर रॉक गार्डन के पीछे कभी पेड़ो का कब्रिस्तान बना हरित क्षेत्र अब फिर हरा-भरा हो गया है। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने जब इस क्षेत्र का नया स्वरूप देखा तो वह दंग रह गए। उनको वन विभाग द्वारा बताया गया कि यह क्षेत्र पंजाब के एरिया से आने वाले सीवेज से प्रभावित था और इसको इको रेस्टोरेशन के माध्यम से हरित क्षेत्र में बदला गया है। इसमें सीवेज का डायवर्जन किया गया और बंडिंग साइट्स के विकास से क्षेत्र का विकास किया गया।
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पंजाब के राज्यपाल और यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने रविवार को चंडीगढ़ के विभिन्न हिस्सों में चल रहे पौधरोपण कार्यों का व्यापक निरीक्षण किया। उन्होंने पौधों की देखरेख और सर्वाइवल रेट पर संतोष जताया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर की हरियाली बनाए रखने के लिए नियमित रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। प्रशासक सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के भीतर कांसल वन क्षेत्र पहुंचे और जैव विविधता संवर्धन तथा इको रेस्टोरेशन कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर गृह सचिव सह सचिव वन एवं पर्यावरण मंदीप सिंह बराड़ मुख्य वन संरक्षक सौरभ कुमार, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार सहित वन विभाग इंजीनियरिंग विभाग और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पौधरोपण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की
प्रशासक ने वन विभाग, इंजीनियरिंग विभाग और नगर निगम द्वारा किए जा रहे पौधरोपण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि पौधों की जीवित रहने की दर 80 से 95 प्रतिशत के बीच है जो प्रशासन की पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। इसकी शुरुआत राजेंद्र पार्क से हुई। फिर प्रशासक सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अंतर्गत कांसल क्षेत्र तक पहुंचे और वहां किए जा रहे पौधरोपण और इको रेस्टोरेशन कार्यों का जायजा लिया।
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मियावाकी पद्धति से बने हरित क्षेत्रों का लिया जायजा
प्रशासक कटारिया ने हाईकोर्ट एंट्री प्वाइंट और जन मार्ग पर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किए गए पौधरोपण का भी निरीक्षण किया जहां 30 हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इसके बाद वह सेक्टर-23 के रोज नर्सरी में नगर निगम द्वारा विकसित मियावाकी पद्धति के उच्च घनत्व वाले पौधरोपण स्थल और सेक्टर 36 के फ्रेग्रेंस गार्डन पहुंचे।
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