जिंदगी में शहद की मिठास घोलने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है। अब उनके लिए कम समय में ज्यादा पैदावार के साथ ही मधुमक्खियों की सुरक्षा बेहद आसान होगी। चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण (आर्टिफिशियल छत्ता) बनाया है जिसके जरिये कम समय में लगभग चार गुना ज्यादा शहद उत्पादन हो सकेगा।
इतना ही नहीं उस आर्टिफिशियल छत्ते से शहद निकालते समय मधुमक्खियों की जान जाने का खतरा भी नहीं मंडराएगा। ऑर्गेनाइजेशन के परसीजन मैकेनिकल सिस्टम के हेड व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हैरी गर्ग ने हनी हार्वेस्टिंग एंड एक्सटेंशन लॉक सिस्टम को बनाया है। डॉ. गर्ग ने बताया कि इस उपकरण के जरिये तैयार किए गए छत्ते में शहद लॉक सिस्टम से एकत्र होगा, जिसे तय समय के बाद लॉक खोलकर निकाला जा सकता है।
लॉक सिस्टम के जरिये मधुमक्खियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा क्योंकि शहद निकालने के लिए छत्ते निचोड़ने की नौबत नहीं आएगी। लॉक खोलते ही शहद अपने आप पाइप के जरिये बाहर रखे बॉक्स में आ जाएगा। इस उपकरण से शहद निकालने के लिए मानव संसाधन की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। वहीं, आर्टिफिशियल छत्ते से साइडइफेक्ट का भी खतरा नहीं होगा क्योंकि उस छत्ते को एचडीपी पॉल्युमर फूड ग्रेड लकड़ी से तैयार किया गया है।
पीएच पैरामीटर नेचुरल होगा, जिससे उसमें नमी की मात्रा कम होगी और शहद का स्वाद और गुणवत्ता दोनों बरकरार रहेगी। डॉ. गर्ग ने बताया कि इस उपकरण के जरिये मधुमक्खियों को बना बनाया छत्ता उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनके द्वारा छत्ता बनाने का समय बच जाएगा। वे सीधे शहद बनाने की प्रक्रिया करेंगी। जितनी देर में एक बार शहद निकलता था उतनी देर में तीन से चार बार यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
इससे प्राप्त होने वाला शहद पूरी तरह प्राकृतिक और स्वादिष्ट होगा क्योंकि उसमें मोम की महक और मधुमक्खियों के अवशेष नहीं होंगे। इस उपकरण का पालमपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोे रिसर्च टेक्नोलॉजी में सफलता पूर्वक ट्रायल हो चुका है।