चंडीगढ़। शिक्षा विभाग की ओर से शुक्रवार को शाम चार बजे ऑनलाइन ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए एंट्री क्लास दाखिले की ड्राॅ प्रक्रिया का आयोजन किया गया। इस दौरान शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को उम्र के आधार पर चार वर्गों में बांटकर दाखिला प्रक्रिया को संपन्न करवाया गया है। ड्राॅ प्रक्रिया के दौरान कुल 865 उम्मीदवार नौनिहालों का चयन किया गया है।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, उम्र वर्ग तीन से चार वर्ष के लिए प्री प्राइमरी लेवल-1 में 774, उम्र वर्ग चार से पांच वर्ष के लिए प्री प्राइमरी लेवल-2 में 35, उम्र वर्ग पांच से छह वर्ष के लिए प्री प्राइमरी लेवल-3 के लिए 40 और उम्र वर्ग छह वर्ष व इससे अधिक के बच्चे को कक्षा-एक में 16 सीटों पर दाखिला दिया गया है। दाखिला प्रक्रिया सेंट्रलाइज्ड माध्यम में आयोजित करवाई गई है। इसमें अभिभावक ने घर के नजदीकी जिस स्कूल को प्राथमिकता में रखा था, बच्चे के दाखिले के लिए उसी स्कूल में ड्राॅ निकाला गया। दाखिला प्रक्रिया में शुक्रवार को कुल 67 निजी स्कूलों को शामिल किया गया। इन स्कूलों में ईडब्ल्यूएस की 25 प्रतिशत सीटों के लिए दाखिला प्रक्रिया का आयोजन किया गया था। विभाग को पांच मार्च तक शहर के 67 निजी स्कूलों की 894 एंट्री क्लास की सीटों पर कुल 3010 आवेदन मिले थे। शिक्षा विभाग की ओर से ईडब्ल्यूएस और डिसएडवांटेज ग्रुप से संबंध रखने वाले विद्यार्थियों के लिए दाखिला प्रक्रिया तीन जनवरी से शुरू की गई थी। ड्राॅ में नाम आने के बाद 17 मार्च तक कागजात जमा करवाने होंगे, अन्यथा दाखिला रद्द हो जाएगा।
कागजात में त्रुटी पाए जाने पर दाखिला होगा रद्द
छात्रों को दाखिले के लिए नजदीकी 10 स्कूलों का विकल्प दिया गया था। हर निजी स्कूल में 25 प्रतिशत सीटें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। दाखिले के लिए उम्मीदवार को जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड, रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट अपलोड करने थे। अगर कागजातों में कोई त्रुटि पाई जाती है तो दाखिला रद्द किया जा सकता है। एनआईसी सॉफ्टवेयर के जरिए यह व्यवस्था ऑटोमैटिक कर दी गई है। इसमें अब बाहरी किसी व्यक्ति की कोई भूमिका शामिल नहीं रहेगी।
कोट्स
खाली सीटों पर होगी दूसरी काउंसलिंग
पहली काउंसलिंग में अगर किसी उम्मीदवार के कागजात में कोई गलती पाई जाती है तो उसका दाखिला रद्द कर दिया जाएगा। दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद खाली बची सीटों पर दूसरी काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। -हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक, यूटी