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कमाल है... रोज गार्डन चंडीगढ़ का वजूद बचा रहा ‘लाल गुलाब’, 825 किस्मों के फूल खिले यहां

Thu, 26 Dec 2019 11:10 AM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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गुलाब का पौधा - फोटो : अमर उजाला
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आपको सुनकर हैरानी होगी कि रोज गार्डन के वजूद को बचाने में एक ‘लाल गुलाब’ का अहम योगदान है, लेकिन यह बात सच है। रोज गार्डन की 824 हाइब्रिड गुलाब की किस्मों को बचाने में यह लाल गुलाब अहम योगदान दे रहा है। यह ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए संभव हो पा रहा है। 1967 में लगभग 42.25 एकड़ भूमि पर गुलाबों के इस संसार को बसाया गया था।
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वर्तमान में रोज गार्डन में 825 गुलाब की किस्में हैं। इनमें 824 हाइब्रिड गुलाब की किस्में और 1 लाल गुलाब (देशी) शामिल है। ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए लाल गुलाब से हाइब्रिड गुलाब की 824 किस्मों को तैयार किया जा रहा है। ग्राफ्टिंग तकनीक के विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम ग्राफ्टिंग के लिए बेहद अनुकूल होता है, इसलिए इन दिनों रोज गार्डन में ग्राफ्टिंग का कार्य तेजी से चल रहा है।
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यह है ग्राफ्टिंग तकनीक

रोज गार्डन में ग्राफ्टिंग तकनीक के विशेषज्ञ प्रभुनाथ वर्मा ने बताया कि इस तकनीक को हिंदी भाषा में कलम बांधना कहते हैं। इसके जरिए एक पौधे के ऊतक दूसरे पौधे के ऊतकों में प्रविष्ट करवाए जाते हैं। इससे दोनों के वाहिका ऊतक आपस में मिल जाते हैं। इस प्रकार अलैंगिक प्रजनन के द्वारा नई नस्ल का पौधा तैयार कर दिया जाता है।

पौधा हो जाता है खत्म
ग्राफ्टिंग तकनीक में लाल गुलाब के एक पौधे का वजूद खत्म हो जाता है। इसलिए गार्डन में ही ग्राफ्टिंग के लिए लाल गुलाब की पौध तैयार करने के लिए अलग से क्यारी की व्यवस्था की गई है। इसमें तैयार होने वाली पौध के जरिए इस तकनीक को आगे बढ़ाया जा रहा है।

गुलाब की ये किस्में हैं नदारद
गुलाब की कामरा, मोनचेनी, कॉरनेट, ब्लैक रोज, औरेंज स्टेशन, टिफनी, रॉयल शो जैसी कुछ रेयर प्रजातियां अभी दिखाई नहीं दे रही हैं। यहां के केयर टेकर यह दावा जरूर कर रहे हैं कि जल्द ही यह किस्में भी रोज गार्डन की शोभा बनेंगी।
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