अंबाला कैंट। साइंस इंडस्ट्री के लिए लाइफ लाइन बनने जा रहा साइंटिफिक कलस्टर जोन लेटलतीफी और लापरवाही की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।
करीब 62 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का बीते सात वर्षों से अधिक समय से इसका इंतजार अंबाला की साइंस इंडस्ट्री करती रही, लेकिन यह प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पाया। इस योजना में साइंस इंडस्ट्री, राज्य और केंद्र सरकार ने योगदान देना था, लेकिन योजना शुरू ही नहीं हो सकी।
अंबाला कैंट की साइंस इंडस्ट्री के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में साइंटिफिक कलस्टर जोन बनाने की योजना बनी। इस पर 62 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट कास्ट रखी गई। इस योजना में साइंस इंडस्ट्री के लिए एक तरह से लाइफ लाइन थी। इस के तहत मशीनरी, ऑप्टिकल यूनिट सहित अन्य सुविधाएं दी जानी थी, जिसकी जरूरत एक साइंस बिजनेस में जरूरी थीं।
इसके लिए अंबाला की दो एसोसिएशनों ने मिलकर काम करना था, जबकि इसमें प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार से भी राशि मिलनी थी। इस संबंध में एसोसिएशनों की मीटिंगें भी हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई नतीजा ही नहीं निकल पाया है।
मझौले और छोटे उद्यमियों को होता लाभ
अंबाला कैंट में साइंस की लघु इकाइयां काफी अधिक हैं। इस योजना को अमलीजामा पहनाए जाने के बाद इस कलस्टर जोन में अत्याधुनिक मशीनें आती, जिनका फायदा इन छोटे व मझोले उद्यमियों को होता। जो उद्यमी भारी मशीनें इंस्टाल नहीं करवा सकते, वे उद्यमी अपने साइंस उपकरण इन मशीनों पर बनवा सकते थे। अंबाला की साइंस इंडस्ट्री को और बूम मिलता, लेकिन अभी तक योजना अधर में ही लटकी है।
नई सरकार से उम्मीद
पूर्व की सरकार द्वारा घोषित यह योजना अब लगभग हाशिये पर चली गई है। ऐसे में अब नई सरकार से ही उम्मीद है कि वह इस योजना को अपने आगामी बजट में किस तरह से लेती है। इस पर एसोसिएशन भी देख रही है कि नई सरकार इस मामले में योजना को लेकर क्या रुख अपनाती है?
‘इस योजना को लेकर कई स्तरों पर बातचीत की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। योजना महत्वाकांक्षी है और साइंस इंडस्ट्री के लिए बेहतर है। अब नई सरकार का क्या रुख होता है, उसे देखते हैं।’
- अश्वनी गोयल, पूर्व प्रधान असीमा