औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित सीटीयू के डिपो नंबर-2 में 60 बसों की चेसी खड़ी हैं, जिनकी बॉडी जयपुर में तैयार होंगी। विभाग ने टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने के बाद जयपुर की एक कंपनी को सीटीयू की बसों के फेब्रिकेशन का काम सौंपा है। इन बसों के तैयार होने के बाद इन्हें लंबे रूट पर उतारा जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन बसों के आने के बाद लंबे रूट के कुछ नए रूट शुरू होंगे, जबकि कुछ बसों को वर्तमान के रूटों पर लगाया जाएगा।
यूटी प्रशासन के परिवहन विभाग ने साल की शुरुआत में ही लंबे रूट के लिए 60 बसों को सड़क पर उतारने की योजना बनाई थी। पांच महीने पहले ही इन बसों की चेसिस चंडीगढ़ पहुंच गई थी। तब से 60 नई बसों की चेसिस औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित सीटीयू के डिपो नंबर-2 में खड़ी हैं। विभाग पहले कहता रहा कि चुनाव की वजह से वह बॉडी के लिए टेंडर नहीं पाए, जिसकी वजह से देरी हुई। अब बसों पर बॉडी लगाने का काम सौंप दिया है। बसों को जयपुर भेजने के लिए तेल भरकर तैयार भी कर दिया है। परिवहन विभाग के निदेशक प्रद्युमन सिंह ने कहा कि बसों के फेब्रिकेशन का काम जयपुर की कंपनी को सौंपा है। दिसंबर में बसें मिल जाएंगी, जिसके बाद इन्हें रूट पर उतारा जाएगा। इन बसों के सड़क पर उतरने से लोगों को काफी लाभ होगा। उन्हें कई अन्य रूटों पर बेहतर सुविधा और विकल्प मिलेंगे। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की यह नई बसें डिपो नंबर-एक की पुरानी 60 बसों को बदलेंगी। बता दें कि वर्ष 2021-22 में पंजाब रोडवेज ने भी करीब 587 बसें जयपुर की इसी कंपनी से तैयार कराई थी। हालांकि बाद में पंजाब के बस बॉडी फैब्रिकेटर्स की तरफ से कई सवाल भी उठाए गए थे।
जरूरत के अनुसार तैयार करा रहे बस की बॉडी : सीटीयू के एक अधिकारी ने बताया कि नॉन-एसी सामान्य बसों की खरीद ऐसे ही की जाती है। बसों की चेसिस खरीदी जाती है। उसके बाद बसों की बॉडी तैयार कराई जाती है। वर्ष 2017-18 में भी सीटीयू ने सामान्य बसों की इसी तरह से खरीद की थी। ऐसा करने के मुख्य रूप से दो कारण हैं। पहला, बसें सस्ती पड़ती है और दूसरा, विभाग उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार बॉडी को तैयार करा पाता है। हालांकि बॉडी के इंतजार में इन 60 बसों की चेसिस पांच महीने डिपो में खड़ी रहीं। बता दें कि एसी बसें पूरी तरह से तैयार ही खरीदी जाती हैं, क्योंकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनमें कई तरह की जटिलताएं होती हैं।