प्रदेश में हर आयु वर्ग के लोग कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। इसकी संख्या 46 फीसदी है। महिलाओं और बच्चों में कुपोषण के कारण एनीमिया की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।
इसलिए आधुनिक जीवन शैली या खान पान में पौष्टिक तत्वों की कमी को दूर करना सरकार की प्राथमिकता है।
इसके लिए फ्लोर मिल्स, एडीबल ऑयल के साथ-साथ खाद्य उत्पादों के उत्पादन से जुड़े लोगों को भी आगे बढ़ना होगा।
फोर्टिफायड आटा में अगर फॉलिक एसिड, आयरन और विटामिन बी-12 को शामिल किया जाए तो लोगों का स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है।
रेड बिशप में वीरवार को पौष्टिक भोजन, स्वस्थ जीवन विषय पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव नवराज संधू ने उद्घाटन के दौरान ये बातें कहीं।
संधू ने कहा कि विटामिन ए की कमी से पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी बच्चे पीछे रह जाते हैं और इम्यूनिटी भी कम होती है।
ऐसे में बेहद जरूरी है कि ऐसा संतुलित आहार लें, जिसमें सब्जियां, फल के अलावा हरे पत्ते वाली सब्जियां शामिल हों।
नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर एवं फूड कमिशभनर एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कुछ मात्रा शरीर के लिए बेहद जरूरी है।
इनकी कमी से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। हरियाणा में सभी वर्गों द्वारा आटा, दूध और खाद्य तेलों का अन्य प्रदेशों की तुलना में अधिक सेवन किया जाता है।
ऐसे में जरूरी है कि खाद्य उत्पादों के फोर्टिफिकेशन को प्रोत्साहित किया जाए।
आटा में पौष्टिक तत्वों की कमी को दूर करना संभव
वहीं, सीनियर एसोसिएशन दीप्ति गुलाटी ने कहा कि फोटिफिकेशन से खाद्य उत्पादों में सभी पौष्टिक तत्वों को शामिल करना संभव है, जिससे गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
रोलर फ्लोर मिलर फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष अधिनारायण गुप्ता ने कहा कि फोर्टिफिकेशन के जरिये आटा में पौष्टिक तत्व की कमी को दूर करना संभव है।
सेक्टर-4 के कुमार फ्लोर मिल्स के गुलशन तनेजा ने कहा कि फोर्टिफायड आटा में सभी पौष्टिक तत्वों को शामिल किया जाता है और प्रति किलो कीमत में भी न के बराबर का अंतर है।
यह बेहतर उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, 100 किलोग्राम फोर्टिफायड आटा में 30 ग्राम आयरन, 1.5 ग्राम फॉलिक एसिड के अलावा कुछ ग्राम विटामिन बी-12 को भी शामिल किया जाए, ताकि पौष्टिक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सके।