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4073 गेस्ट टीचर्स की नौकरी बचेगी या जाएगी, फैसला आज

Wed, 27 May 2015 11:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 4073 गेस्ट टीचरों को हटाने के बारे में प्रदेश सरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगी कि गेस्ट टीचरों को नौकरी से हटाया गया है या नहीं।
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प्रदेश सरकार के लिए यह उलझन भरी स्थिति है, क्योंकि राज्य में गेस्ट टीचर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर चुके हैं। वहीं हाईकोर्ट में सरकार पहले ही गेस्ट टीचरों को सरप्लस बता चुकी है। इस कारण सरकार के सामने कोई बीच का रास्ता खोज पाना भी मुश्किल है।

मंगलवार को गेस्ट टीचरों की याचिका खारिज होने के बाद बुधवार को उन्होंने हाईकोर्ट की डबल बेंच के सामने अपील करने का प्रयास किया, लेकिन एकल पीठ का लिखित ऑर्डर जारी नहीं होने के कारण गेस्ट टीचरों का यह प्रयास भी विफल रहा। अब बुधवार को हाईकोर्ट में मुख्य केस की ही सुनवाई होगी, जिसमें राज्य सरकार को सरप्लस 4073 गेस्ट टीचरों को हटाकर अनुपालना रिपोर्ट पेश करनी है।
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सरकारी स्कूल कर चुके टीचर्स को कार्यमुक्त

दूसरी ओर, एलीमेंटरी शिक्षा विभाग द्वारा बीते सप्ताह जारी की गई 4060 सरप्लस गेस्ट टीचरों की सूची के बाद हटाए जाने वाले गेस्ट टीचरों को सरकारी स्कूलों से पहले ही कार्य मुक्त कर दिया गया है।

अब गेस्ट टीचर प्रदेश भर में आंदोलन तेज करने की तैयारी में जुट गए हैं। सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के लिए गेस्ट टीचरों ने धर्मांतरण की धमकी भी सरकार को दे रखी है। इसी कड़ी में काफी संख्या में धर्मांतरण के शपथपत्र भी तैयार किए जा चुके हैं।

दिल्ली में जब गेस्ट टीचरों का आमरण अनशन शुरू होगा, वहीं गेस्ट टीचरों को ये शपथ पत्र बांटे जाएंगे और वहीं शपथपत्र पर हस्ताक्षर करके गेस्ट टीचर अपना धर्मांतरण करेंगे। इस बारे में मिशनरियां गेस्ट टीचरों के संपर्क में भी हैं।

गेस्ट टीचरों का कहना है कि जब सरकार ने उनका रोजगार ही छीन लिया है तो कम से कम धर्मांतरण करके समुदाय विशेष के लोग उन्हें सहारा तो देंगे। फिलहाल, गेस्ट टीचरों को सरकार द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने के जवाब का इंतजार है।

धर्मांतरण के लिए शपथपत्र तैयार

काफी संख्या में धर्मांतरण के शपथपत्र भी तैयार किए जा चुके हैं। दिल्ली में जब गेस्ट टीचरों का आमरण अनशन शुरू होगा, वहीं गेस्ट टीचरों को ये शपथ पत्र बांटे जाएंगे और वहीं शपथपत्र पर हस्ताक्षर करके गेस्ट टीचर अपना धर्मांतरण करेंगे।

इस बारे में मिशनरियां गेस्ट टीचरों के संपर्क में भी है। गेस्ट टीचरों का कहना है कि जब सरकार ने उनका रोजगार ही छीन लिया है तो कम से कम धर्मांतरण करके समुदाय विशेष के लोग उन्हें सहारा तो देंगे। फिलहाल, गेस्ट टीचरों को सरकार द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने के जवाब का इंतजार है।

संगठनों से लामबंद होने का आह्वान

हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष दलबीर किरमारा ने प्रदेश के कर्मचारी संगठनों से अपील की है कि वे गेस्ट टीचरों व अन्य कच्चे कर्मचारियों की नौकरी बचाने के लिए एक मंच पर आकर लड़ाई का ऐलान करें।

उन्होंने सरकार से भी मांग की कि वह उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर गेस्ट टीचरों, कंप्यूटर लैब सहायकों व अन्य कच्चे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की बजाय कैबिनेट की बैठक बुलाकर उन्हें नियमित करने का फैसला ले ताकि हजारों युवा बेरोजगार होने से बच सके।

दलबीर किरमारा ने कहा कि ऐसी संकट की घड़ी में इन संगठनों का साथ देना जरूरी भी है, लेकिन यह सब कर्मचारी संगठनों की नियमित प्रक्रिया है, वहीं इसके विपरीत सरकार तेज गति से इन कच्चे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने पर उतारू है।
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टीचरों के मुद्दे पर विज की चुप्पी

गेस्ट टीचरों के रोजगार को बचाने के लिए खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। उन्होंने ही सीएम को गेस्ट टीचरों के रोजगार को किसी तरह बचाने का प्रयास करने के लिए पहले चिट्ठी लिखी, बाद में स्पेशल कैबीनेट की मीटिंग बुलाने को भी कहा। मंत्री विज लगातार गेस्ट टीचरों के रोजगार को बचाने के लिए प्रयासरत थे।

मगर अब जब सरकार द्वारा इस मसले पर हाईकोर्ट में जवाब देने का वक्त आ गया है, तो उसके ठीक दो दिन पहले मंत्री विज ने इस मसले पर चुप्पी साध ली है। मंत्री विज से जब इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर वे कुछ नहीं बोल सकते। क्योंकि ये मसला उनके महकमे का नहीं है।

ये मसला शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के मंत्रालय का है। इसलिए इस बारे में शिक्षा मंत्री ही जवाब देंगे। गेस्ट टीचरों के बारे में वे जो कहना चाहते थे, वो पहले ही कह चुके हैं। बहरहाल, विज की इस चुप्पी ने इस बात का इशारा तो दे दिया है कि सरकार का निर्णय गेस्ट टीचरों के पक्ष में सकारात्मक नहीं है।
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