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Chandigarh News: हरियाणा में 40 हजार टन कचरे का नहीं हुआ निस्तारण

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हरियाणा सरकार ने दिसंबर तक निपटान का लक्ष्य रखा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय संस्थाओं के अंतर्गत निकलने वाले कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अभी तक कुल 1 लाख टन कचरे में से 60 हजार टन का ही निपटान हो पाया है, शेष 40 हजार टन कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इससे न केवल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि डंपिंग ग्राउंड के आसपास के इलाकों में लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने शेष कचरे के निस्तारण के लिए दिसंबर 2024 तक का लक्ष्य रखा है। अगर समय पर कूड़े का समाधान नहीं हो पाया तो संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई तय है।
हर नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका ने शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए कंपनियों को ठेका दिया हुआ है। सालभर में इस प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये एकत्रित होते हैं, लेकिन अधिकतर स्थानों पर कंपनी मिलीभगत करके कूड़ा एकत्रित तो कर रही हैं, लेकिन उसका निस्तारण नहीं कर रही हैं। हाल ही में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के नव नियुक्त मंत्री सुभाष सुधा के पास जब यह मामला पहुंचा तो उन्होंने सभी संस्थाओं से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेशभर में अभी 40 हजार टन कूड़ा ऐसा है, जिसका निपटारा किया जाना है, मतलब इससे खाद आदि बनाकर बेचा जाना है। लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते बिना निस्तारण के ही कूड़े को लगातार एकत्रित किया जा रहा है। अब सरकार ने इसके लिए दिसंबर तक समय तय किया है। इसके बाद काम नहीं करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। इस बारे में मंत्री सुभाष सुधा का कहना है कि पर्यावरण को देखते हुए यह फैसला लिया है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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बाक्स
ईको ग्रीन पर कार्रवाई कर चुकी सरकार
गुरुग्राम और फरीदाबाद में डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली चीनी कंपनी इको ग्रीन पर हरियाणा सरकार कार्रवाई कर चुकी है। कंपनी का ठेका रद्द किया जा चुका है। यहां पर कंपनी के पास 2107 से 21 साल तक का अनुबंध था। लेकिन मिलीभगत के चलते बिना कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाए ही कंपनी काम कर रही थी, जिसके चलते कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। जबकि अनुबंध के तहत कंपनी को कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाना था।
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