सिटी ब्यूटीफुल देश का ऐसा पहला शहर बन गया है जहां ड्रोन (अनमैंड एरियल व्हीकल) से ज्योग्रॉफिक इंफोर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) 3डी मैपिंग का काम शुरू हो गया है। शुक्रवार को ड्रोन उड़ाकर सबसे पहले सेक्टर-7 से ड्रोन मैपिंग की शुरुआत हुई।
सेक्टर-7 की मैपिंग पूरी होने के बाद सेक्टर-16 और 23 में काम शुरू होगा। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ऑफ टेकभनोलॉजी (पैक) और आईआईटी दिल्ली की तकनीकी मदद से पूरे शहर की मैपिंग का काम होगा। जीआईएस मैपिंग के बाद घर बैठे अपने कंप्यूटर पर प्रापर्टी और दूसरी तरह की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। जीआईएस मैप लेयर में होगा। इन लेयर पर क्लिक करते ही जानकारी उभरकर सामने आ जाएगी। मैप में सभी रोड, गवर्नमेंट प्लॉट, पार्क, ग्रीन एरिया, पब्लिक बिल्डिंग्स और सीवर लाइन की जानकारी होगी।
डीसी अजीत बालाजी जोशी ने बताया कि जीआईएस मैपिंग होने के बाद प्रापर्टी संबंधी झगड़े काफी कम हो जाएंगे। जहां भी अतिक्रमण होगा प्रशासन को तुरंत पता चल जाएगा। चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह सुविधा शुरू की गई है।
यह है जीआईएस मैपिंग
सांकेतिक चित्र
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जीआईएस एक कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम है जो धरती की सतह पर विभिन्न तरह केडाटा को कैप्चरिंग, स्टोरिंग, चेकिंग करने केबाद डिस्प्ले करता है। जीआईएस एक ही मैप में विभिन्न तरह का डाटा दिखाता है। यह मैप चीजों को देखने, समझने और विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है। जिससे ग्राउंड लेवल चीजों को देखने जैसा अनुभव मिलता है। इस मैप डाटा लेयर में होता है। जिस लेयर पर क्लिक करेंगे उसको हाइलाइट करके दिखाएगा।
अतिक्रमण पर लगेगी रोक
जीआईएस मैपिंग में जूम कर प्लॉट की पूरी जानकारी देखी जा सकती है। प्लॉट की लंबाई और चौड़ाई भी नजर आती है। बाद में यदि इसकी लंबाई चौड़ाई में कोई फर्क मिलता है तो एस्टेट ऑफिस को अतिक्रमण हटवाने के लिए किसी शिकायत का इंतजार नहीं करना होगा।
यह डाटा किया जा सकता है शामिल
ड्रोन
इसमें जनसंख्या, लोगों की इनकम और एजुकेशन लेवल को शामिल किया जा सकता है। लैंड संबंधी डाटा में नदियों, विभिन्न तरह के पेड़-पौधों, पार्क, पार्किंग, बिल्डिंग्स और मिट्टी की जानकारी डाली जा सकती है। इसकेअलावा कारखानों, खेतों, स्कूलों, ड्रेन, रोड और इलेक्ट्रिक पॉवर लाइनों की जानकारी भी इस मैप से मिल सकती है। विभिन्न मेथड से गणना भी की जा सकती है।
वॉटर सप्लाई और सीवर लाइन की समस्या होगी खत्म
वाटर सप्लाई लाइन और सीवर लाइन की जीआईएस मैपिंग का फायदा यह होगा कि कहीं पर अगर लाइन में फॉल्ट आ जाता है तो इस सिस्टम से उसके बारे में तुरंत पता चल जाएगा। इसको ठीक करना मुश्किल नहीं होगा।
परमिशन मिलेगी जल्द
विभिन्न प्रोजेक्ट्स अलग-अलग तरह की परमिशन नहीं मिलने के कारण ही अटके रहते हैं। कहीं पर खुदाई करने और केबल इत्यादि की जानकारी में ही काफी समय लग जाता है। इस सिस्टम से सभी तरह की जानकारी मैप पर क्लिक करते ही उभरकर सामने आ जाएगी। जिससे परमिशन लेने में आसानी होगी।