चंडीगढ़। 150 करोड़ के कर्जे में चल रही पंजाबी यूनिवर्सिटी को सोमवार को सरकार ने 90 करोड़ की पहली ग्रांट देने का पत्र जारी किया। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अरविंद ने मंगलवार को सेक्टर 27 के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बजट सत्र में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यूनिवर्सिटी की जरूरत के अनुसार ग्रांट देने को कहा था। यूनिवर्सिटी की 360 करोड़ की ग्रांट की मांग थी। इसी कड़ी में सोमवार को कुलपति को पहले तीन महीने के लिए 90 करोड़ मिलने की लिखित में सूचना मिल गई है। महीनों से वेतन न मिलने पर सोमवार को यूनिवर्सिटी में कुलपति दफ्तर के बाहर अध्यापकों ने प्रदर्शन किया था। कुलपति ने बताया उनका पहला उद्देश्य अध्यापकों को वेतन देना और सुचारू रूप से सभी कक्षाओं को चलाना होगा। हालांकि उन्हें मिले बजट से वह केवल चीजें मैनेज कर पाएंगे पर कुछ न होने से होना बेहतर है।
यूनिवर्सिटी पर अनावश्यक भर्तियां करने के इल्जाम लगे थे। इस पर कुलपति ने जवाब दिया कि उनके कार्यकाल में कोई नई भर्तियां नहीं हुई हैं। यूनिवर्सिटी में 30 प्रतिशत पद खाली हैं और अध्यापकों की कमी है। गैर अध्यापन स्टाफ का वेतन बकाया राशि का बहुत छोटा मार्जन है। यदि 10-20 प्रतिशत कर्मचारियों को निकाला जाता है तो भी बकाया राशि पर खास फर्क नहीं पड़ेगा।
1962 से गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा देने में कार्यरत
यूनिवर्सिटी के योगदान पर बात करते हुए प्रो. अरविंद ने कहा कि 1962 से यूनिवर्सिटी मालवा के गरीब, पिछड़े बच्चों को शिक्षा देने में कार्यरत है। यूनिवर्सिटी आगे भी इसी तरह शिक्षा का निदान करना चाहती है। पर यूनिवर्सिटी कई समय से अनुदान की किल्लत का सामना कर रही है। अन्य विश्वविद्यालय के मुकाबले पंजाबी यूनिवर्सिटी ने फीस नहीं बढ़ाई है। विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के लिए अनुदान की आवश्यकता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व सरकारों ने यूनिवर्सिटी की समस्याओं को समझा पर फिर भी यूनिवर्सिटी कर्जे में है। प्रशासन के समक्ष बात रखी जाएगी कि यूनिवर्सिटी का कर्जा माफ किया जाए।
हर महीने 30 करोड़ की मिलेगी ग्रांट
यूनिवर्सिटी को हर महीने 30 करोड़ की ग्रांट मिलेगी। 360 करोड़ बजट के अलावा यूनिवर्सिटी 200 करोड़ राशि फीस के जरिए प्राप्त करती है। बजट में से करीब 39 करोड़ वेतन के बिल पर खर्च होंगे। यूनिवर्सिटी पर 150 करोड़ का बकाया है जिस पर 10 करोड़ से अधिक का ब्याज है।