चंडीगढ़। कार लोन की 60 किस्तों का भुगतान कर एनओसी मांगने पर 55763 रुपये बकाया बताकर सात और किस्तें जमा करने का दबाव बनाने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड पर 35 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। आयोग ने टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड चंडीगढ़ के ब्रांच मैनेजर को याचिकाकर्ता को 15 हजार रुपये केस खर्च भी देने का आदेश दिया है। उपभोक्ता की ओर से दायर याचिका पर जवाब देते कहा गया कि कंपनी की ओर से शिकायतकर्ता को 4,02,654 रुपये का कार लोन दिया गया था। उपभोक्ता को 6,55,091 रुपये चुकाने थे। लोन की इस रकम को 67 किस्तों में अदा किया जाना था। शिकायतकर्ता पर 55,763.13 रुपये की राशि बकाया रहती थी, जिसका भुगतान 7 किस्तों में करने के लिए कहा गया था लेकिन शिकायतकर्ता ने उक्त राशि का भुगतान नहीं किया। कंपनी ने आयोग से शिकायत को खारिज करने की मांग की। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से पेश तथ्यों को जांचने और दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाते हुए कंपनी पर हर्जाना लगाया है। दायर याचिका के मुताबिक मोहाली के खरड़ स्थित सन्नी एन्क्लेव के रहने वाले बाल कृष्ण (38) ने जुलाई 2022 में जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की थी। याचिका में पीड़ित याची ने आयोग को बताया कि उसने पंचकूला स्थित एक कंपनी से 7 दिसंबर 2016 को टाटा जेस्ट कार खरीदी थी। कार खरीदने के लिए पर्याप्त रकम न होने के चलते उसने 4 लाख 2 हजार 654 रुपये की रकम टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड से कार खरीदने के लोन ली थी। पीड़ित के मुताबिक 10,707 रुपये मासिक के हिसाब से लोन 60 किस्तों में अदा करना था। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने सभी 60 किस्तों का भुगतान करने के बाद जब 11 अप्रैल 2022 को कंपनी में एनओसी लेने के लिए पहुंचा तो उसे 55 हजार 763 रुपये के बकाया बताकर सात और किस्तें जमा कराने के लिए कहा गया। इन सात किस्तों का भुगतान न करने पर कार को कब्जे में लिए जाने की बात कही गई।