पीजीआई में 2016 में सामने आए फर्जी एंबुलेंस रैकेट मामले में पुलिस ने बुधवार को जिला अदालत में 11 आरोपियों के खिलाफ 3447 पेज का चालान दायर कर दिया। इनमें मुख्य सरगना गगनदीप मान उर्फ फौजी, जिसे अदालत पहले ही भगौड़ा (पीओ) करार दे चुकी है, उसका नाम भी शामिल है।
आरोपियों में सात पीजीआई के कर्मी भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 384, 473 और 120बी के तहत आरोप पत्र दायर किया है। पुलिस ने चालान में आरोपियों के नेक्सस (रैकेट) को साबित करने के लिए उनके बीच फोन पर हुई बातचीत की करीब 1600 पेज की कॉल डिटेल बतौर सबूत पेश की है। यह केस में इनके खिलाफ सबसे अहम सबूतों में से एक है। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी।
पुलिस की ओर से दायर चालान में पीजीआई के सात कर्मचारियों सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार, शशि, गुरकिरपाल, शव बांधने का काम करने वाले अश्विनी कुमार, तीरथपाल, अश्विनी के अलावा मोर्चरी में तैनात विक्की के नाम शामिल हैं। इनके अलावा मुख्य सरगना ट्रांसपोर्टर सतिंदर सत्ती और सहआरोपी राजकुमार उर्फ राजू, ट्रांसपोर्टर रविंदर और गगनदीप मान उर्फ फौजी के नाम शामिल हैं। इनमें केवल गगनदीप मान ही गिरफ्तार नहीं हो सका है।
पुलिस ने बनाए 66 गवाह
पुलिस ने केस में 66 गवाह बनाए हैं। इनमें मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की रेडक्रास सोसाइटी के मैनेजर अश्विनी खन्ना को शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह बनाया गया है। इसके अलावा रेडक्रास सोसाइटी चंडीगढ़ और पंजाब की ओर से चलने वाली एंबुलेंस के चालकों को भी गवाह बनाया गया है। इन चालकों ने केस दर्ज होने से पहले भी सोसाइटी और पुलिस को निजी एंबुलेंस चालकों के खिलाफ शिकायत दी हुई थी। इन चालकों ने आरोपियों की पहचान भी की थी। इसके अलावा केस में 3 इंडिपेंडेंट गवाह भी बनाए गए हैं। वहीं, कुछ पीजीआई अधिकारियों और कर्मियों को भी केस में गवाह बनाया गया है।