चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लॉकडाउन के दौरान पांच किस्तें न देने पर ग्राहक की सहमति के बगैर लोन की समय अवधि बढ़ाने पर इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कंपनी पर 30 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये का भुगतान करने के लिए कहा है।आयोग में दी शिकायत के मुताबिक ग्राहक ने कंपनी से 24 लाख रुपये का लोन लिया था। शिकायतकर्ता के आरोपों के मुताबिक कोरोना काल के दौरान लगे लॉकडाउन में कारोबार न चलने के कारण वह लोन की पांच किस्तें जमा नहीं कर पाया। इस पर कंपनी ने बिना उनकी सहमति के लोन की अवधि बढ़ा दी, जबकि लोन को लेकर कंपनी के नियम व शर्तों के तहत बैंक को किस्त की समय अवधि बढ़ाने के लिए उससे सहमति लेनी चाहिए थी। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को याचिकाकर्ता को हर्जाने के साथ ही केस खर्च अदा करने के आदेश दिए हैं।
सेक्टर-23डी निवासी तरुण अरोड़ा ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड 24,41,798 रुपये का लोन लिया था। कंपनी से लिए लोन की अदायगी के लिए वह 5 अप्रैल 2016 से प्रतिमाह 30,610 रुपये की किस्त दे रहे थे। उन्हें पूरे लोन की रकम की अदायगी 144 किस्तों में 5 अप्रैल 2028 तक चुकाना था। शिकायतकर्ता के मुताबिक कंपनी ने जनवरी में निकाली गई एक योजना के तहत उसके लोन की किस्त को घटाकर 29,333 रुपये प्रति माह कर दिया। इसी बीच साल 2020 कोरोना काल के दौरान सरकार की ओर से लॉकडाउन लगा दिया गया। लॉकडाउन दौरान कारोबार बंद होने के चलते वह लोन की पांच किस्तें अदा नहीं कर सका। इसके बाद कंपनी ने बिना उसकी सहमति लिए लोन की समय अवधि 144 किस्तों से बढ़ाकर 187 कर दी। साथ ही मासिक किश्त की राशि को 29,333 रुपये से बढ़ाकर 30,971 रुपये कर दी। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई इस अवधि और मनमानी को लेकर ग्राहक ने आयोग में शिकायत दी थी।