सेक्टर-31 स्थित 3 बीआरडी एरिया में शनिवार को सीवरेज की सफाई करने मैनहोल में उतरे तीन कर्मचारियों की मौत हो गई। इन मौतों से नगर निगम में चल रही भाई-भतीजावाद की नई कहानी भी सामने आई है।
सलाहकार विजय देव ने गृह सचिव को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही नगर निगम से कहा है कि वह पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा दे।
इस पूरे हादसे का सबसे अमानवीय पहलु यह रहा है कि काम पर आते वक्त तो कर्मचारियों को सेफ्टी उपकरण नहीं मिले मगर जैसे ही उनकी मौत की खबर अधिकारियों तक पहुंची आनन-फानन में घटनास्थल पर ऑक्सीजन सिलेंडर, पानी की बाल्टियां और अन्य सामान रखकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि कर्मचारियों के पास सेफ्टी यंत्र थे। पुलिस ने उनके चौथे साथी के बयान पर ठेकेदार जसपाल कौर पर धारा-304 के तहत मामला दर्ज कर उसे जमानत पर छोड़ दिया।
एक-एक कर गए मौत के मुंह में
शनिवार सुबह करीब 10 बजे पंचकूला के भैंसा टिंबा निवासी भूरा सिंह (35), अशरफ (30), धान सिंह (40) व प्रेमपाल (35) सीवरेज की सफाई करने पहुंचे। सबसे पहले धान सिंह मैनहोल में उतरा। लेकिन, जब वह बाहर नहीं आया तो प्रेमपाल उसे देखने उतरा। वह भी बाहर नहीं आया, तो बाहर मौजूद अन्य दो कर्मचारियों ने आवाज लगाई, मगर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अशरफ भी मैनहोल में उतर गया। वह भी काफी समय तक नहीं लौटा तो अकेले बचे भूरा सिंह ने इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी, जिनकी मदद से पुलिस व फायर विभाग को सूचित किया गया।
ठेकेदारी का सच
मेनहोल की सफाई का ठेका जिस महिला जसपाल कौर के पास है उसका पति सुखराज नगर निगम के जनस्वास्थ्य विभाग में है और जनस्वास्थ्य विभाग ही मैनहोल के सीवरेज की सफाई का टैंडर अलॉट करता है। ठेकेदार के कारिंदे भूरा सिंह का कहना है कि सुखराज ही हमें काम के लिए बुलाता था। भूरा सिंह उन तीन कारिंदों का ही साथी है, जिनकी सीवरेज में उतरने पर मौत हो गई। संबंधित पेज 5 पर
पांच गुना महंगा टेंडर था
चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद का कहना है कि ठेकेदार को पांच गुना महंगा टेंडर अलॉट किया गया, ताकि वह सभी सावधानियां बरते, लेकिन ठेकेदार ने ऐसा नहीं किया। कारिंदों को खतरे में डाला। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हर हालत में होगी। अब वह भविष्य में कोई टेंडर नहीं भर सकती है।