विधायक की अगुवाई में लोगों ने किया धरना प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
मोहाली पुडा भवन में सोमवार को दोपहर दो बजे ईडब्ल्यूएस के चार हजार मकानों के लिए निकाले जाने वाले ड्रॉ से ठीक पहले हंगामा हो गया। लोगों का आरोप था कि ड्रॉ में शामिल की जाने वाली सूची में सैकड़ों लोगों के नाम बेवजह काट दिए गए थे।
सूचना मिलते ही मौके पर विधायक बलबीर सिंह सिद्धू भी पहुंच गए। काफी देर तक वह लोगों के साथ धरने पर बैठे रहे। गुस्साए लोगों ने सड़क पर कुछ समय के लिए जाम भी लगाया। तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद शाम पांच बजे ड्रॉ की प्रक्रिया शुरू हुई। जो कि देर रात तक चलती रही। पूरे ड्रॉ की वीडियोग्राफी भी करवाई गई।
जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री योजना के तहत सबके लिए घर स्कीम के तहत गमाडा की ओर से ड्रॉ निकालने की प्रक्रिया शुरू होनी थी। लोग सुबह से ही एतराज देने के लिए पहुंच गए थे। लोगों की संख्या काफी अधिक थी। लोगों का कहना था कि जानबूझकर लिस्ट से उनके नाम काट दिए गए हैं। हालांकि गमाडा अधिकारियों का कहना था कि उनके पास जो लिस्ट आई है। उसके नाम ही सूची में शामिल किए गए है। इसके बाद जैसे ही करीब दो बजे ड्रॉ की प्रक्रिया तो फिर से बवाल शुरू हो गया। जिनके नाम लिस्ट में नहीं थे। वे ड्रॉ स्थगित करने की मांग पर अड़े थे। वहीं, जिनके नाम सूची में थे वे ड्रॉ करवाने की मांग पर अड़े थे।
गमाडा ने ड्रॉ प्रक्रिया की करवाई वीडियोग्राफी
विधायक की अगुवाई में लोगों ने किया धरना प्रदर्शन
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विधायक बलबीर सिंह सिद्धू का कहना था कि जिन लोगों के नाम काटे गए है। उनके एतराज सुने जाए। वहीं, जिन लोगों के नाम सूची में उन्हें सीधे अलाटमेंट दे दी जाए। विधायक ने लोगों से ऐतराज लेकर गमाडा को सौंपे। वहीं, गमाडा के एसीए ने लोगों को बताया कि यह पहली स्कीम नहीं है। इसके बाद भी स्कीम निकाली जाएगी। एतराजों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने लोगों से सहयोग देने की अपील की है।
7308 लोगों की अर्जियां शामिल की गई
चार हजार मकानों के लिए निकाले गए ड्रॉ में 7308 अर्जियों को शामिल किया गया। इस दौरान एक हजार लोगों के नाम वेटिंग में रखे गए। अगर बाद में उक्त लोगों के दस्तावेजों में किसी भी तरह की कोई कमी पाई जाती है तो वेटिंग में रखे लोगों को मकान अलाट किए जाएंगे।
हजारों लोगों के नाम कैसे हुए कैंसिल
वहीं, इस दौरान लोगों का आरोप था कि हजारों लोगों ने स्कीम में आवेदन किया था, लेकिन सिर्फ सात हजार नाम ही कैसे ड्रॉ में शामिल किए गए। यह किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इतने लोगों के नाम कैसे काट दिए गए।