चंडीगढ़। शहर के ज्यादातर सरकारी और निजी भवनों के पास फायर एनओसी ही नहीं है। इनमें पंजाब और हरियाणा विधानसभा, सचिवालय और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, नेहरू अस्पताल को छोड़ पीजीआई के दूसरे सभी भवन शामिल हैं। इनमें से कई भवनों में रोजाना ट्राइसिटी से बड़ी संख्या में लोग अपने काम के लिए पहुंचते हैं। शहर में आए दिन आगजनी की घटनाएं हो रहीं हैं, बावजूद इसके फायर एनओसी नहीं ली जा रही।
हालात यह है कि आगजनी की घटना पर फायरबिग्रेड के पहुंचने से पहले आग पर काबू पाने के लिए कई भवनों-शोरूम व गोदामों में अग्निशमन उपकरण तक नहीं होते। हाल ही में औद्योगिक क्षेत्र, फेज-2 में क्रॉकरी शोरूम व गोदाम में लगी आग को बुझाने के लिए भी अग्निशमन उपकरण मौके पर मौजूद नहीं थे। नगर निगम के अधीन आने वाला दमकल विभाग पिछले चार महीने से शहर के कारोबारियों व संस्थानों को फायर एनओसी के लिए नोटिस भेज रहा है लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
कुछ महीने पहले चंडीगढ़ दमकल विभाग ने 15 मीटर से ऊंची सभी इमारतों का सर्वे किया था। इसमें सामने आया था कि पंजाब और हरियाणा विधानसभा, सचिवालय और हाईकोर्ट जैसी हेरिटेज इमारतों के पास भी फायर एनओसी नहीं है। शहर में 15 मीटर से ऊंची सिर्फ 80 इमारतें हैं, जिनके पास फायर एनओसी है जबकि 262 इमारतें ऐसी हैं, जिनके मालिकों व संचालकों ने एनओसी के लिए आवेदन ही नहीं किया है। विभाग के पास 78 इमारतों के आवेदन लंबित हैं।
अगर सरकारी रिकॉर्ड पर ही नजर डालें तो शहर के सरकारी सहित कई सारे निजी अस्पतालों ने भी फायर की एनओसी नहीं ले रखी है। पीजीआई में केवल नेहरू ब्लॉक बिल्डिंग के पास ही फायर एनओसी है। कुछ दिन पूर्व नगर निगम आयुक्त ने पीजीआई के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की थी जिसमें पीजीआई के अन्य भवनों के पास फायर एनओसी नहीं होने को लेकर बातचीत हुई थी। बता दें कि पीजीआई में बीते एक साल में कई बार आगजनी की घटना हो चुकी है। वहीं, शहर का दिल कहे जाने वाले सेक्टर-17 में सबसे ज्यादा इमारतों के पास फायर एनओसी नहीं है। इस क्षेत्र में कई सरकारी और निजी संस्थानों के कार्यालय और बाजार हैं। इसके अलावा कई बड़ी इमारतों के संचालकों सहित निजी स्कूलों के प्रंबंधनों ने भी फायर एनओसी नहीं ले रखी है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र में भी अधिकतर कारोबारियों व दुकानदारों ने फायर एनओसी नहीं ले रखी है। इनके पास आग बुझाने वाले उपकरण भी नहीं हैं।