चंडीगढ़। पीजीआई में नौकरी करने वाले सैकड़ों कर्मचारी सरकारी आवास के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं जबकि संस्थान के 253 सरकारी मकान खाली पड़े हैं। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि इन मकानों का समय पर अलॉटमेंट नहीं होने से कर्मचारियों को महंगा किराया देने के साथ रोजाना लंबा सफर करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, खाली मकानों के कारण संस्थान को हर साल करोड़ों का वित्तीय नुकसान हो रहा है। मामला अब केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तक पहुंच गया है। कर्मचारी संगठन इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी में हैं।
पीजीआई की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ सेंट्रल वर्कर्स यूनियंस के चेयरमैन अश्वनी कुमार मुंजाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और पीजीआई की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। आरटीआई का हवाला देते हुए पत्र में बताया गया है कि अलग-अलग श्रेणियों के 253 मकान खाली हैं। इनमें कुछ मकान 7 सितंबर 2017 से ही खाली पड़े हैं। वर्ष 2018 में एक, 2019 में छह, 2020 में 15, 2021 में 21, 2022 में 33, 2023 में 31, 2024 में 56, 2025 में 69 और 2026 में 20 मकान खाली हुए।
पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव सत्यवीर सिंह डागर ने कहा कि कर्मचारी परेशान हैं लेकिन प्रशासन उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा। कई कर्मचारी 20 से 25 किलोमीटर दूर से ड्यूटी करने आ रहे हैं। उनका कहना है कि सेक्टर-12 और सेक्टर-24 में सरकारी आवास खाली होने के बावजूद कर्मचारियों को अलॉटमेंट नहीं किया जा रहा। इससे किराये के साथ आने-जाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। 2026-27 की प्राथमिकता सूची में करीब 1000 कर्मचारी सरकारी आवास के इंतजार में हैं।
44 मकानों के आवंटन की सिफारिश, 12 रद्द
7 मई 2026 को हाउस अलॉटमेंट कमेटी की बैठक में 44 मकानों के आवंटन की सिफारिश की गई थी। इनमें नए आवंटन के साथ मकान बदलने और उच्च श्रेणी के आवास के मामले भी शामिल थे। 22 मई को आवंटन संबंधी कार्यालय आदेश जारी हुए, लेकिन 23 मई को इनमें से 12 मकानों का आवंटन रद्द कर दिया गया।
हर साल 4.28 करोड़ रुपये नुकसान का दावा
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार खाली मकानों के कारण पीजीआई को हर साल करीब 4.28 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है। इसमें लाइसेंस फीस और पात्र कर्मचारियों को मिलने वाले 20 प्रतिशत हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) को आधार बनाया गया है। कर्मचारी संगठन के मुताबिक पिछले पांच-छह वर्षों में संस्थान को 20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
कृषि की डिग्री वाले जेई को सिविल काम की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक पीजीआई के इंजीनियरिंग विभाग के हॉर्टिकल्चर सेक्शन में तैनात एक जेई के पास बीएससी एग्रीकल्चर की योग्यता है। आरोप है कि पिछले करीब छह-सात वर्षों से उन्हें सेक्टर-24 और फैकल्टी आवासों में सिविल व पब्लिक हेल्थ से जुड़े विभिन्न काम और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी दी गई है। हॉर्टिकल्चर कर्मचारियों के अनुसार उनके सेक्शन में पहले से स्टाफ की कमी है। कर्मचारियों का सवाल है कि 50-60 साल पुराने आवासों की मरम्मत और रिनोवेशन में सिविल स्ट्रक्चर की मजबूती से जुड़े काम की निगरानी किस तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर की जा रही है।
किस श्रेणी में कितने मकान खाली
टाइप 13/1: 100
टाइप 11/3: 53
टाइप 12/2: 26
टाइप 14: 15
टाइप 10/4: 22
टाइप 9: 7
टीएफ/एमएम: 10
टाइप सी: 12
एफ ब्लॉक: 4
टाइप 6: 2
टाइप 8: 2
कुल: 253