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नोटबंदी के दो महीने बाद भी इंडस्ट्री के हाल बेहाल, देखिए रिपोर्ट

Mon, 09 Jan 2017 05:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नोटबंदी के चलते लोग हुए परेशान
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नोटबंदी के दो महीने बाद भी इंडस्ट्री के हाल बेहाल हैं। अकेले चंडीगढ़ में 2300 से अधिक यूनिट्स मंदी की मार झेल रहे हैं। बात चाहे लाइट इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, स्क्रू निर्माण की हो या इलेक्ट्रिोनिक्स आइट्म्स, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी या फिर हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट्स, फर्नीचर, स्टील फर्नीचर, सेनेटरी फिटिंग, नट-बोल्ट निर्माण की।
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सभी यूनिटस इन दिनों मार्केट में डिमांड न होने से नुकसान झेल रही हैं। वहीं, डिमांड नहीं होने के कारण लेबर भी काम छोड़ घर बैठने को मजबूर हैं। वर्ष 2006 में एमएसएमई एक्ट आने के बाद से जनवरी 2016 तक शहर में कई नई यूनिट्स शुरू हुई थीं। वहीं, अप्रैल 2015 से जून 2016 तक 248 नई यूनिट्स भी शुरू हुईं। एमएसएमई एक्ट आने के बाद 1380 यूनिट्स ने खुद को एंटरप्रेन्योर मेमोरेंडम-2 में सूचीबद्ध कर लिया।

वहीं, एक्ट से पहले स्मॉल स्केल इंडस्ट्री के तहत दो हजार से अधिक यूनिट्स चल रही थी। एक जुलाई 2015 में इंडस्ट्री पॉलिसी आने के बाद इंडस्ट्री को ग्रोथ की उम्मीद थी, लेकिन इंडस्ट्री उतनी ग्रोथ नहीं कर पाई जितनी उम्मीद थी। वहीं, रही सही कसर नवंबर 2016 में नोटबंदी ने पूरी कर दी। इसके बाद से इंडस्ट्री की कमर टूट गई है।
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ठप हो गई प्रिं​टिंग इंडस्ट्री, सेल पर पड़ा असर

नोटबंदी के चलते लोग हुए परेशान
प्रिंटिंग उद्योग से जुड़े मुकेश छाबड़ा के अनुसार नोटबंदी के बाद से सेल पर काफी असर पड़ा है। 60 से 70 प्रतिशत तक सेल कम हो गई है। मार्केट में पैसे का फ्लो न होने से डिमांड नहीं आ रही है। इसका सीधा असर उनके व्यापार पर पड़ा है। वहीं, कंप्यूटर हार्डवेयर के काम से जुड़े विकास जैन का कहना है कि नवंबर में दूसरे सप्ताह से सेल एकदम से गिर गई थी। 50 से 60 फीसदी सेल डाउन हो गई।

दिसंबर में थोड़े हालात सुधरे तो सेल 70 फीसदी तक रिकवर हुई। जनवरी की शुरुआत से थोड़े हालात सुधर रहे हैं। वहीं जैन के अनुसार पहले कैश और चेक से पेमेंट लेते थे, लेकिन अब सभी कार्ड और चेक से ही पेमेंट कर रहे हैं। वहीं बैंक से कैश न मिल पाने के कारण कैश संबंधी पेमेंट में दिक्कत आ रही है। वहीं, इंडस्ट्रियलिस्ट करण छाबड़ा के अनुसार नोटबंदी से व्यापार चौपट हो गया है।

इंडस्ट्री में कैश, चेक और अन्य साधनों से पेमेंट की जाती है। लेकिन, अब सरकार चाहती है कि सभी पेमेंट कार्ड या चेक से की जाए। ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि कोई भी लेबर चेक से पैसा लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में वह काम छोड़ रहे हैं। वहीं लोगों की क्रय शक्ति कम होने से बाजार में भी डिमांड पर नेगेटिव असर पड़ा है।
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केमिकल सप्लाई और पैकेजिंग का कारोबार खत्म

नोटबंदी के चलते लोग हुए परेशान
केमिकल सप्लाई से जुड़े इंडस्ट्रियलिस्ट तेजिंदर सिंह के अनुसार नोटबंदी के बाद से बिजनेस पर बुरा असर पड़ा है। पैकेजिंग के काम की मार्केट से डिमांड बहुत कम हो गई है। लोगों ने पैसे न होने के कारण खर्चें कम कर दिए तो मार्केट में डिमांड कम हो गई। इससे इंडस्ट्री पर भी सीधा असर पड़ रहा है। वहीं लेबर भी काम छोड़ रही है।

एक हजार से अधिक हैं प्रिंटिंग यूनिट्स
शहर में हजारों छोटे-बड़े एंटरप्रेन्योर प्रिंटिंग उद्योग से जुड़े हुए हैं। यहां एक हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी यूनिट वर्तमान में काम कर रही हैं। इनसे करीब 4 से 5 हजार लोगों को रोजगार मिलता है। नोटबंदी के बाद से लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ा है। कैश सैलरी न मिलने से लोग काम छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। लेबर कैश में सैलरी चाहती है और सरकार चाहती है उन्हें चेक से भुगतान किया जाए। ऐसे में लेबर भी काम छोड़ अन्य कामों पर लग गए हैं।

इस तरह का होता है यहां काम
चंडीगढ़ प्रिंटिंग कारोबार में स्टेशनरी प्रिंटिंग, फ्लैक्स प्रिंटिंग, रोटा प्रिंटिंग, डिजिटल प्रिंटिंग, मैग्जींस, लाइट इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, स्क्रू निर्माण इलेक्ट्रिॉनिक्स आइट्मस, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी, हैंडलूम, हैंडीक्रॉफ्ट्स, फर्नीचर, स्टील फर्नीचर, सेनेटरी फिटिंग, नट-बोल्ट निर्माण से जुड़ी इंडस्ट्री मुख्य रूप से काम कर रही हैं।
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