स्वास्थ्य विभाग के निदेशक के साथ हुई बातचीत का किया बहिष्कार
कहा- आशा वर्कर्स को किया धमकाने का प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लिपिकों की एक माह से भी अधिक समय से चल रही हड़ताल और पटवारियों की ओर से अतिरिक्त कार्य को छोड़ने के आंदोलन के बीच अब स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा वर्कर्स भी तीन दिन की हड़ताल पर जा रही हैं। मंगलवार आठ से दस अगस्त तक वर्कर्स अपने मानदेय सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर रहेंगी। सोमवार को पंचकूला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए बुलाई बैठक में अधिकारियों के रवैये से खफा होकर वर्कर्स ने पूर्व में नियोजित आंदोलन के तहत हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।
आशा वर्कर्स का कहना है कि सोमवार को पंचकूला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आशाओं की मांगों पर सकारात्मक रूप से बातचीत करने की बजाय डराने धमकाने की कोशिश की। यहां तक कहा कि सरकार को हल्के में न लें, सरकार आंदोलनकारियों को जेल भेज सकती। इसके प्रतिरोध में प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत का बहिष्कार कर दिया। आशा वर्कर्स का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जनहित का हवाला देकर आशा वर्कर्स को बिना मानदेय दिए ऑनलाइन काम करने के लिए बाधित कर रहा है और दूसरी तरफ हरियाणा सरकार व स्वास्थ्य विभाग पिछले 17 साल से स्वास्थ्य विभाग के अंदर ही काम करने वाली आशा वर्कर्स के स्वास्थ्य की गारंटी नहीं कर पाया हैं। तीन साल से आशा वर्कर अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर बार-बार स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और सरकार को पत्र लिख रही है। संसाधनों व स्टाफ की कमी और काम के दबाव के चलते गर्भवती महिलाओं, आम जनता के साथ नागरिक अस्पतालों में दुर्व्यवहार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आशा वर्कर्स यूनियन ने कहा कि आशाओं को धमका कर आंदोलन के लिए मजबूर करना है। यूनियन हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और सरकार से मांग करती है कि तुरंत प्रभाव से सरकार की ओर से दी जाने वाली धमकियों पर रोक लगाई जाए और आशा वर्कर्स की मांगों व समस्याओं का समाधान किया जाए। मंगलवार आठ अगस्त से प्रदेश की 20,000 आशा वर्कर्स तीन दिन की हड़ताल पर रहेंगी। मांगों का समाधान ना होने पर हड़ताल आगे जारी रह सकती है। यह जानकारी राज्य प्रधान सुरेखा व महासचिव सुनीता ने दी।