हरियाणा में जजों की नियुक्ति को लेकर हुए एचसीएस (ज्यूडिशियल) पेपर लीक प्रकरण में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच पर सवाल उठाए जाने के बाद पुलिस ने मंगलवार को कांग्रेसी नेता सुनील कुमार चोपड़ा उर्फ टीटू को गिरफ्तार कर लिया। सुनील पर मुख्य आरोपी सुनीता के साथ मिलकर पेपर बेचने का आरोप है। वहीं, एसआईटी ने पिछले चार महीने से फरार चल रही और मुख्य आरोपी सुनीता की सेक्टर-18 स्थित राधा कृष्ण मंदिर में बने गेस्ट हाउस में रूममेट रही आयुषी गोदारा (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया है।
उसे सोमवार को दिल्ली बार्डर के पास झज्जर के बहादुरगढ़ स्थित फार्म हाउस से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को मंगलवार को जिला अदालत में पेश किया। पुलिस ने आयुषी का चार दिन का जबकि किांग्रेसी नेता टीटू का दो दिन का रिमांड हासिल किया है। पेपर लीक की जांच के दौरान सुनीता की रूममेट आयुषी की भूमिका भी सामने आई थी। वहीं जनवरी में सुशीला की गिरफ्तारी के बाद आयुषी की भूमिका को लेकर पुलिस को कई सबूत मिले थे। पुलिस ने उसकी तलाश की तो वह फरार मिली। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल रहा था।
सोमवार को एसआईटी ने सूचना के आधार पर आयुषी को दिल्ली बार्डर के पास झज्जर के बहादुरगढ़ स्थित एक फार्म हाउस से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे चंडीगढ़ लाया गया। सूत्रों के अनुसार पुलिस पूछताछ में उसने कांग्रेसी नेता सुनील कुमार चोपड़ा उर्फ टीटू का भी नाम लिया। पुलिस ने उसकी डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर कांग्रेसी नेता को मंगलवार गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया। कांग्रेसी नेता का दो दिन और आशुषी का चार दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर रही है।
ये रहे रिमांड के आधार
पुलिस ने आयुषी के रिमांड के लिए दलील दी कि उन्हें मामले में संदिग्ध उसके पिता सुभाष गोदारा को गिरफ्तार करना है। आयुषी से पूछताछ में उसकी भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच में सामने आया है कि पिता-पुत्री ने सुनीता के कहने पर पेपर के लिए कैंडीडेट तलाश किए थे। इसलिए मामले की जांच और सुभाष की गिरफ्तारी के लिए उससे पूछताछ जरूरी है।
कांग्रेसी नेता ने सुनीता के साथ मिलकर बेचे पेपर
पुलिस ने कांग्रेसी नेता सुनील चोपड़ा टीटू का पांच दिन का रिमांड मांगा था। इसके लिए पुलिस ने दलील दी कि आरोपी ने मुख्य आरोपी सुनीता के साथ मिलकर पेपर के लिए कैंडीडेट तलाश किए थे। इसके अलावा उनके गेस्ट हाउस में ही रहने की भी व्यवस्था की थी। पुलिस के अनुसार उन्हें उन कैंडीडेट के बारे में पूछताछ करनी है, जिन्हें उसने पेपर बेचे थे। वहीं बचाव पक्ष ने उसके खिलाफ कोई सबूत न होने और केस में झूठा फंसाए जाने की दलील देते हुए रिमांड का विरोध किया। अदालत ने दोनों की दलीलें सुनने के बाद टीटू को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
कांग्रेसी नेता से मारपीट के आरोप
बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि, पुलिस ने कांग्रेसी नेता को सोमवार रात ही घर से उठा लिया था। जबकि उसकी गिरफ्तारी मंगलवार सुबह दिखाई गई। वहीं बचाव पक्ष के वकील ने एसआईटी पर आरोप लगाया कि उन्होंने कांग्रेसी नेता टीटू से पुलिस हिरासत में मारपीट की गई है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने इस पर पुलिस को आरोपी का पेशी के बाद और रिमांड समाप्त होने से पहले मेडिकल कराने के आदेश दिए।
19 सितंबर 2017 को मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी
HCS पेपर लीक केस
मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने 19 सितंबर को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 8, 9, 13 (1) डी, 13 (2) और आईपीसी 409, 420, 120बी के तहत सेक्टर-3 के थाने में एफआईआर दर्ज की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर ही इसकी जांच के लिए स्पेशल टीम (एसआईटी) बनाई गई थी। एसपी रवि कुमार के नेतृत्व में डीएसपी कृष्ण कुमार और इंस्पेक्टर पूनम दिलावरी इसकी जांच कर रहे हैं।
पंचकूला के पिंजौर की निवासी सुमन ने एडवोकेट मंजीत सिंह के जरिये याचिका दायर कर कहा था कि हरियाणा ने एचसीएस ज्यूडिशियल के 109 पदों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसके लिए याची ने भी अप्लाई किया था। परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग सेंटर भी ज्वाइन किया। इस दौरान उसकी दोस्ती एक लड़की सुशीला से हो गई जिसने गलती से याची को एक ऐसी ऑडियो क्लिप भेज दी जिसमें वह अन्य लड़की से डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात कर रही थी।
जब याची ने सुशीला से पूछा तो सुशीला ने वो ऑडियो क्लिप डिलीट कर दी। जब जोर देकर पूछा गया तो पेपर लीक होने की बात पता चली। सुशीला ने पेपर सुनीता से लिया था और सुनीता के पास पेपर बलविंद्र शर्मा से आया था। इन आरोप के चलते सुनीता, सुशीला और बलविंद्र शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया गया था और तीनों को ही गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
मामले में 39 गवाह बनाए गए
hcs Paper Leak
मामले में एसआईटी की ओर से केस में 39 गवाह बनाए गए हैं। इनमें मुख्य गवाहों में हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन (एचपीएससी) के चेयरमैन और सेक्रेटरी को भी सरकारी गवाह बनाया गया है। हाईकोर्ट के कुछ कर्मियों को भी सरकारी गवाह बनाया है। इनमें डॉ. शर्मा के आफिस में आने-जाने वालों की एंट्री करने वाले कर्मी को भी शामिल किया गया है। साथ ही सुनीता की शर्मा से मिलने आने के वक्त रजिस्टर में एंट्री का रिकार्ड भी बतौर सबूत शामिल किया गया है।
इसके अलावा पुलिस ने जिस प्रिंटिंग प्रेस में पेपर छपा था उसके कुछ कर्मियों को भी केस में गवाह बनाया है। चार्जशीट के मुताबिक, डॉ. शर्मा अक्सर सुनीता से मिलने सेक्टर-18 में जाता था, जहां वह रहती थी। इस दौरान डॉ. शर्मा कभी भी सरकारी गाड़ी नहीं ले गया। वह अक्सर ऑनलाइन टैक्सी बुक करता था। पुलिस ने एक ड्राइवर राजेश को भी सरकारी गवाह बनाया है। उसी ने शर्मा को सेक्टर-18 में सुनीता जहां रहती थी, वहां ड्रॉप किया था।
10 जुलाई को दिया था बलविंदर ने सुनीता को पेपर
एचसीएस (ज्यूडिशियल) पेपर लीक
पुलिस चार्जशीट के मुताबिक डॉ. बलविंदर शर्मा ने सुनीता को 10 जुलाई 2017 को पेपर सौंपा था। बलविंदर खुद इस दिन उसे सेक्टर-24 में मिलने गए थे। सुनीता ने डॉ. शर्मा को सेक्टर-23/24 की डिवाइडिंग रोड पर बुलाया था। शाम को 7 से 8 के बीच डॉ. शर्मा उससे मिलने गए थे। वहीं, उन्होंने सेक्टर-24 स्थित एक पार्क के पास सुनीता को पेपर दिया था। साथ ही उसकी आंसर शीट भी दी थी।
फरवरी में प्लानिंग के तहत बंद कर दी थी अपने फोन से बातचीत
डॉ. शर्मा और सुनीता ने पूरी प्लानिंग के तहत फरवरी 2017 में ही अपने-अपने मोबाइल नंबर से फोन पर बातचीत बंद कर दी थी। हालांकि, इससे पहले दोनों के बीच पिछले एक साल में साढ़े सात सौ से अधिक बार बातचीत और मैसेज भेजे गए थे। फरवरी में सुनीता ने जिस मंदिर में वह रहती है, उसके कैंटीन संचालक की मदद से अपनी रूममेट की आईडी और एक अन्य आईडी पर जियो के दो सिम लिए थे।
इन दोनों सिम से ही इसके बाद सुनीता और डॉ. शर्मा के बीच बातचीत होती थी। फरवरी से लेकर जुलाई तक दोनों के बीच 1152 बार फोन पर बात हुई। सुनीता ने फरवरी में ही पेपर लीक को लेकर प्लानिंग कर ली थी। इसके साथ ही उसने पेपर को आगे एक से डेढ़ करोड़ रुपये में बेचने के लिए कोचिंग सेंटर से ही ऐसे कैंडीडेट तलाशने शुरू कर दिए थे, जो उसे पैसे दे सकें।
डॉ. शर्मा का लैपटॉप और पेन ड्राइव बनेगी अहम सबूत
बातचीत करते आरोपी सुनीता और हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. बलविंदर कुमार शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने केस में डॉ. शर्मा का लैपटॉप, पेन ड्राइव और प्रिंटर भी बतौर सबूत पेश की है, जिसके जरिए उसने पेपर लीक किया था। हालांकि, डॉ. शर्मा लैपटॉप और पेन ड्राइव से पेपर डिलीट कर चुके थे, लेकिन पुलिस ने सीएफएसएल से इसे रिकवर करवा लिया था।
साथ-साथ जाते थे घूमने
पुलिस चार्जशीट के मुताबिक डॉ. शर्मा और सुनीता एक दूसरे को वर्ष 2014 से जानते थे। पुलिस चार्जशीट के अनुसार दिसंबर 2016 में दोनों साथ-साथ ब्रह्मसरोवर, थानेसर जिला कुरुक्षेत्र जाते थे। वहां ये दोनों अक्सर जाट धर्मशाला में रुकते थे। इसके बाद ये दोनों मार्च, अप्रैल, मई और जून 2017 में भी बाहर साथ-साथ घूमने गए थे। इसके अलावा भी दोनों कई बार अन्य राज्यों में एक साथ घूमने जाते थे।