फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कभी गहरे दोस्त थे, अब मेयर चुनाव में प्रतिद्वंद्वी

Wed, 06 Jan 2016 12:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
मेयर पद के उम्मीदवार मुकेश बस्सी और अरुण सूद के बीच कभी गहरी दोस्ती थी, लेकिन अब एक दूसरे के खिलाफ न सिर्फ चुनाव लड़ रहे हैं बल्कि एक दूसरे की पार्टी में सेंधमारी की गुजत में लगे हुए हैं।
विज्ञापन


दोनों एक दूसरे के खिलाफ जमकर प्रचार कर रहे हैं। किसी समय दोनों एक साथ मिल कर कांग्रेस के खिलाफ ही रणनीति तैयार करते थे। कांग्रेस के मेयर पद के उम्मीदवार मुकेश बस्सी साल 2009 से लेकर जून 2011 तक भाजपा में रहे। भाजपा में मुकेश बस्सी प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे।

उन्हें मुख्य प्रवक्ता की भी जिम्मेवारी अध्यक्ष संजय टंडन ने सौंपी थी। बस्सी को मुख्य प्रवक्ता बनवाने में अरुण सूद की अहम भूमिका रही थी, क्योंकि सूद उस समय प्रदेश महासचिव के पद पर तैनात थे। जबकि बस्सी भाजपा में जाने से पहले कांग्रेस पार्टी में ही थे। कांग्रेस की टिकट पर बस्सी मौलीजागरंा सीट से साल 2006 में पार्षद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
विज्ञापन


साल 2011 में कांग्रेस में जब बस्सी फिर से शामिल हुए तो भी उनकी संबंध अरुण सूद के साथ ठीक रहे। लेकिन पिछले साल जब सूद और बस्सी दोनों ही अपनी अपनी पार्टी में मेयर पद के दावेदारों की दौड़ में शामिल हो गए तब कुछ दोस्ती कम होनी शुरू हो गई।

कई मनोनीत पार्षद दोनों के करीबी  
नगर निगम के कई मनोनीत पार्षद ऐसे हैं जिनके लिए यह चयन करना मुश्किल हो रहा है कि वह किस उम्मीदवार को वोट दें क्योंकि उनके अरुण सूद और मुकेश बस्सी दोनों ही करीबी है।

लेकिन यह अंतर है दोनो उम्मीदवारों में
मेयर पद के उम्मीदवार अरुण सूद और मुकेश बस्सी में एक बड़ा अंतर है वह यह कि सूद विवाद में रहना पंसद करते हैं जबकि बस्सी विवादों से दूर रहते हैं। भाजपा पार्षद दल के नेता होने के कारण अरुण सूद सदन में हर मुद्दे पर चर्चा करते हैं। उनका पिछले चारों कांग्रेस मेयर के साथ तनातनी का माहौल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें