साल 1984 के दंगों के दौरान यूपी से अपना सब कुछ गंवाकर पंजाब आए दंगा पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार ने साल 2006 में संपत्ति के नुकसान का 10 गुना मुआवजा देने की पॉलिसी तो बनाई, लेकिन उसे आज तक लागू ही नहीं किया। इसके खिलाफ एक दंगा पीड़ितों की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर अब जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को पांच दिसंबर के लिए नोटिस जारी किया है।
याची इंद्रबीर सिंह छटवाल की ओर से एडवोकेट राकेश भाटिया के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि 1984 में हुए दंगों के दौरान देश के कई हिस्सों में जानमाल की भारी हानि हुई। इस दौरान पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश व देश के अन्य हिस्सों में भी लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। याची के मुताबिक वे दंगे की आग से प्रभावित उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से बचकर पंजाब आ गए थे। तब पंजाब सरकार की ओर से उन्हें 2-2 लाख रुपये का मुआवजा तो दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से साल 2006 में बनाई गई स्कीम का लाभ उन्हें आज तक नहीं मिला।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र की स्कीम के तहत दंगा पीड़ितों को उनकी संपत्ति को पहुंचे नुकसान का 10 गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया गया था। पीड़ितों को इस स्कीम का लाभ 2006 में ही मिल जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। याची ने इस संबंध में हाईकोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं का हवाला देते हुए यह भी बताया कि कई मामलों में हाईकोर्ट ने पीड़ितों को साल 2006 के बाद हुए भुगतान पर ब्याज जोड़ने के आदेश भी सरकार को दिए हैं।