चंडीगढ़। 1962 इंडो-चाइना वार के हीरो ब्रिगेडियर एजेएस बहल का बुधवार को चंडीगढ़ में निधन हो गया। युद्धबंदी रह चुके ब्रिगेडियर को भारत सरकार को रिपैट्रिएट किया गया था, जिसके बाद उन्होंने 1965 में रण ऑफ कच्छ के ऑपरेशन और 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया। उनके निधन पर बुधवार को सेक्टर 25 के मुक्तिधाम में परिजन और शहर वासियों ने उन्हें नम आंखों से दी अंतिम विदाई दी।
ब्रिगेडियर एजेएस बहल 17 पैरा फील्ड रेजिमेंट के एक आर्टिलरी अधिकारी थे। उन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में भाग लिया था। एक युवा अधिकारी के रूप में उन्होंने अक्तूबर 1962 के दौरान 7 इन्फैंट्री ब्रिगेड के हिस्से के रूप में नामका चू में चीनी सैनिकों से बहादुरी से लड़ाई लड़ी। बाद में उन्हें अपने साथियों के साथ युद्ध बंदी बना लिया गया। अगले वर्ष उन्हें वापस भारत भेज दिया गया और उन्होंने फिर से अपनी यूनिट के साथ सेवा की। अपनी बाद की सेवा में उन्होंने 1965 के रण ऑफ कच्छ ऑपरेशन और 1971 के युद्ध में भाग लिया। वह अप्रैल 1995 में उप महानिदेशक एनसीसी, जम्मू-कश्मीर के पद से सेवानिवृत्त हुए।