धार्मिक यात्रा के लिए पाकिस्तानी हिंदुओं की संख्या अधिक थी। भारत सरकार ने इन पाकिस्तानियों को पांच मई की सुबह अटारी सड़क सीमा पर पहुंचने के निर्देश दिए थे। वतन जाने के लिए उत्साहित कई पाकिस्तानी सोमवार शाम को ही अटारी सीमा पार करने के लिए पहुंच गए थे। सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इन पाकिस्तानियों को वापस भेज दिया था। इस पर पाकिस्तानियों ने रात अमृतसर में बिताई।
मंगलवार सुबह पाकिस्तानी नागरिक विभिन्न समूहों में सीमा पर पहुंचे। बुरहानपुर,जोधपुर और लुधियाना से एक-एक पाकिस्तानी नागरिक आए थे। कोलकाता से दो, आगरा, रायबरेली, रामपुर, कौशाम्बी, कोहलापुर, कोटा और फिरोजपुर व गुरुग्राम से चार-चार, लखनऊ और भोपाल से पांच, बिजनौर और आनंद से छह-छह पाकिस्तानी सीमा पर पहुंचे। जलगांव से सात, मुंबई, दिल्ली, रायपुर और जयपुर से नौ-नौ, अहमदाबाद से 12, मध्य प्रदेश से 33 और नागपुर से 49 लोग शामिल हैं।
जो फंसे हैं, वे पाकिस्तानी उच्चायोग के संपर्क में रहें
पाकिस्तानी एहसान अहमद ने बताया वह 12 मार्च को भारत आया था। 19 मार्च तक वापस आने की उम्मीद थी। लॉकडाउन के कारण वह नहीं लौटा। भारत में जितने भी पाकिस्तानी नागरिक फंसे हुए है, उनसे अनुरोध है की जब तक उनके वतन लौटने की तारीख तय नहीं हो जाती वह घरों में रहें। पाकिस्तान उच्चायोग के संपर्क में रहें। पाकिस्तान दूतावास सभी पाकिस्तानियों की वापसी के लिए प्रयास कर रहा है।
लॉकडाउन दौरान उन्हें सभी सुविधाएं दी गई। बीमार को दवा मिली। साथ ही वतन लौटने की दुआ भी। वीजा की तारीख खत्म हो चुकी थी। उनके वीजा की अवधि बढ़ाई गई। एक अन्य पाकिस्तानी बासित ने दोनों सरकारों को उनकी सुरक्षित वापसी के लिए धन्यवाद दिया। अप्रैल की शुरुआत में 41 पाकिस्तानी पहले चरण में वाघा सीमा के माध्यम से घर लौटे थे।