अधिवक्ता जय सिंह देशवाल को जाट धर्मशाला में सम्मानित करते समाज के लोग।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान विभिन्न धाराओं में आरोपी 16 लोगों को अदालत ने सबूतों के अभाव में गुरुवार को बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद समुदाय के लोगों ने न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। साथ ही अधिवक्ता जय सिंह देशवाल को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। इससे पहले समुदाय के लोगों ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 32 साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं सरकार से इस मामले में जेल में बंद अन्य साथियों की रिहाई की गुहार लगाई।
बता दें आंदोलन के बाद मांगे राम ढुल, जगतार सिंह, रणजीत सिंह, मनजीत सिंह, सोमवीर, नसीब श्योकंद, दलबीर ढांडा, सुरेंद्र अंबरसर, शमशेर ढुल, बाबू राम, केहर सिंह, विकास उर्फ विक्की, जोगिंद्र, विशाल श्योकंद, मान सिंह और शमशेर सिंह को भादस की धारा 147, 149, 283 और 341 के तहत आरोपी बनाया गया था। करीब साढ़े सात साल के बाद सीजेएम जतिन गर्ग की अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर इन्हें बरी कर दिया। फैसला आने के बाद जाट धर्मशाला में लड्डू बांटे गए और अधिवक्ता जय सिंह देशवाल को सम्मानित किया गया।
जाट धर्मशाला के पूर्व प्रधान सुरेंद्र अंबरसर ने बताया कि इस लड़ाई में सभी समाज के लोगों का सहयोग रहा। समुदाय ने इसे सहनशीलता और धीरज के साथ लड़ा है। यह सर्वसमाज की जीत है। हालांकि इस दौरान उनके साथ जुड़े एक साथी का स्वर्गवास भी हो गया। उन्होंने समाज की ओर से न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया।