अध्यापकों ने काले बिल्ले लगाकर किया सरकार का विरोध
- हरियाणा रोडवेज और सरकारी स्कूलों को भी निजी हाथों में सौंपने के निर्णय पर जताया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। हरियाणा रोडवेज की हड़ताल का समर्थन करते हुए और रोडवेज के निजीकरण व भाजपा सरकार की तानाशाही के विरोध में अध्यापकों ने काले बिल्ले लगाकर शिक्षण कार्य किया। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान राजेंद्र पालने कहा कि मुख्यमंत्री निजीकरण की नीतियों को बढ़ावा देते हुए रोडवेज के बेड़े में 720 प्राइवेट बसों को शामिल करने के लिए अड़ियल रवैया अपनाए हुए है जिससे बेरोजगार युवाओं को रोडवेज में पक्का रोजगार मिलना बंद हो जाएगा। नाममात्र युवाओं को ही कच्चा रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर रोडवेज के बेड़े में सरकारी बसें शामिल होती हैं तो एक बस पर पांच से सात युवाओं को पक्का रोजगार मिलेगा। आज रोडवेज में करीब 14 हजार बसों की जरूरत है। अगर ये बसें रोडवेज में शामिल हों तो लगभग 70 हजार युवाओं को प्रदेश सरकार पक्का रोजगार दे सकती है। लेकिन विभागों का निजीकरण करके प्रदेश सरकार आम जनता को पक्के रोजगार से वंचित करना चाहती है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों को भी सरकार निजी हाथों में सौंपना चाहती है जिसे अध्यापक बिल्कुल भी सहन नहीं करेंगे, इसीलिए आज रोष स्वरूप काले बिल्ले व रिबन लगाकर शिक्षण कार्य किया गया और 22 अक्टूबर को भी काले बिल्ले व रिबन लगाकर रोडवेज के निजीकरण व भाजपा सरकार की तानाशाही का विरोध किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत 720 प्राइवेट बसें लाने का निर्णय वापिस ले और कर्मचारी नेताओं से बातचीत कर मामले को सुलझाये।