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कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में बच्चे को लेकर उसके माता पिता पहुंचे, वहां भी प्रॉपर उपचार नहीं मिला,

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स्ट्रे डॉग ने पांच साल के बच्चे को दौड़ा दौड़ाकर काटा, लहूलुहान
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सबहेड
ढकौली में हुई घटना, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में नहीं मिला पूरा उपचार, चंडीगढ़ किया रेफर

दीपक शाही
जीरकपुर। शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार शाम को गुरुद्वारा नाभा साहिब से माथा टेककर लौट रहे स्कूटर सवार दंपति को दौड़ाकर गिराने की घटना के बाद बुधवार दोपहर करीब 12.45 बजे एक लावारिस (स्ट्रे) कुत्ते ने पांच साल के मासूम प्रियांशु को दौड़ा-दौड़ाकर कर गई जगह काट लिया। कुत्ते के हमले में बच्चे के सिर, आंख, मुंह और होंट लहूलुहान हो गए।
घटना के समय प्रियांशु खेल रहा था। खून से लहूलुहान अपने बच्चे को देखकर माता-पिता घबरा गए और आनन-फानन में उसे नजदीक के ढकौली स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर लेकर पहुंचे लेकिन प्रियांशु को प्राथमिक उपचार देकर चंडीगढ़ सेक्टर-32 के जीएमसीए रेफर कर दिया गया। इस दौरान बच्चा दर्द से कराह रहा था। बच्चे के पीड़ा से परेशान माता-पिता को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर करें तो क्या करें क्योंकि जिस उम्मीद से वह अपने बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे थे, वह पूरा नहीं हुआ। डॉक्टरों ने उचित ट्रीटमेंट के अभाव का हवाला देकर उसे चंडीगढ़ रेफर कर दिया। बच्चे के पिता विजय कुमार का कहना था कि अगर ढकौली के हेल्थ सेंटर में जनरल सर्जन की तैनाती की गई होती तो उनके बेटे प्रियांशु को चंडीगढ़ रेफर नहीं करना पड़ता और उनके बच्चे इतनी दर्द न सहना पड़ता। सिर्फ इतना हीं नहीं डॉग बाइट के दो इंजेक्शन लगने थे, लेकिन अस्पताल में सिर्फ एक ही इंजेक्शन था।
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एंबुलेंस तक नहीं मिली, अस्पताल में दर्द से आधे घंटे तक कराहता रहा प्रियांशु
प्रियांशु के पिता विजय कुमार ने बताया कि अस्पताल में मरीजों को प्रॉपर दवाई तक नहीं मिलती। आज उनके बच्चे की हालत गंभीर है तो उसे चंडीगढ़ तक ले जाने के लिए अस्पताल की ओर से एंबुलेंस तक मुहैैया नहीं करवाई गई। विजय का कहना था कि उन्हें अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि एंबुलेंस कर्मी स्ट्राइक पर हैं, इसलिए एंबुलेंस नहीं मिल सकती। ढकौली के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (पीएमओ) डा. पॉमी ने बताया कि बुधवार को 12 घंटे के लिए सुबह 8 से रात 8 बजे तक एंबुलेंस कर्मी स्ट्राइक पर हैं, इसलिए उन्हें वह एंबुलेंस मुहैया नहीं करा सकते। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बाहर ऑटो वाले भी आधे घंटे बाद मिले। ऐसे में उनका बच्चा दर्द से तड़पता रहा।

एक माह में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में डॉग बाइट के करीब 400 मामले आए
जानकारी के मुताबिक ढकौली के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में एक माह में करीब 400 डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। अगर रोजना के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 5-10 केस हेल्थ सेंटर में डॉग बाइट के आते हैं। बुधवार को करीब सात मामले हेल्थ सेंटर में डॉग बाइट के आए थे। पिछले एक सप्ताह के डॉग बाइट के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो सोमवार को 11, मंगलवार को 7 व बुधवार को पांच डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं।

बिजली चली जाए तो अंधेरे में यहां टॉर्च के सहारे लगाते हैं इंजेक्शन
ढकौली के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में अगर सुबह के समय भी बिजली चली जाए तो अंदर इतना अंधेरा हो जाता है कि मरीज को टॉर्च के सहारे इंजेक्शन लगाना पड़ता है। बुधवार को दोपहर के समय भी अचानक लाइट चली गई। इस बीच मरीजों को अंधेरे में नर्सिंग स्टूडेंट्स को टॉर्च का सहारा लेकर इंजेक्शन लगाना पड़ा।
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कोट
यहां आने वाले हर डॉग बाइट केस में रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है, लेकिन ज्यादा गहरा जख्म होने पर मरीज को एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लगाना पड़ता है, ये इंजेक्शन काफी कॉस्टली है और हेल्थ सेंटर में उपलब्ध नहीं है। रहा सवाल इंजेक्शन रूम में बिजली जाने के बाद बैकअप का तो जेनरेटर और इनवर्टर की सुविधा अस्पताल में है, बुधवार को किसी कारणवश नहीं चल पाया होगा।
-डॉ. पॉमी, पीएमओ, ढकौली के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर
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