बीच रास्ते गर्मी में हांफने लगती हैं हरियाणा रोडवेज की वोल्वो बसें
- एक माह के अंदर दिल्ली से चंडीगढ़ आने वाली बसों में खराबी की पंचकूला से मिली करीब सात लोगों की शिकायतें
- शताब्दी से खाना और ब्रेक फास्ट हटा दिया जाए तो वोल्वो और शताब्दी के किराए में नहीं कोई विशेष फर्क
- कुल खरीदी गई 28 में से 11 बसें अभी ऑन रूट, बस खराब होने पर घंटों चिलचिलाती धूप में सड़कों पर खड़े रहते हैं यात्री
दीपक शाही
पंचकूला। तापमान 40 डिग्री के पार। तेज धूप और गर्मी के बीच हरियाणा रोडवेज की हांफती एयर कंडीशन बसें। कब रास्ते में धोखा दे जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। खासकर गुरुग्राम से दिल्ली होते हुए चंडीगढ़ आने वाली वोल्वो बसों में तो सवार होने से पहले सोच समझकर चढ़े। क्योंकि दिल्ली से अंबाला के बीच आजकल ये बसें अक्सर अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचे से पहले ही धोखा दे जाती हैं। नतीजतन घंटों यात्रियों को हाइवे के किनारे इस चिलचिलाती गर्मी में दूसरे बसों के आने की राह देखनी पड़ती है। इसलिए हरियाणा रोडवेज की वोल्वो और मर्सडीज बसें इन दिनों यात्रियों के लिए आफत बनी हुई हैं। इन बसों की मियाद पूरी होने के बाद भी इन्हें सड़कों पर ताबड़तोड़ दौड़ाया जा रहा है।
अधिकारिक सूत्र बताते हैं कि इन बसों के महंगे रेट और रखरखाव के कारण फिलहाल हरियाणा सरकार ने इनकी और खरीद से हाथ खींच लिए हैं। वोल्वो बसों की आयु 10 लाख किलोमीटर तक है। फिलहाल सड़क पर दौड़ रही सभी वोल्वो बसें 10 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी हैं। इसके चलते चंडीगढ़ डिपो की सभी 10 बसें और गुरुग्राम डिपो की 7 बसें खराब खड़ी हैं। फिलहाल गुरुग्राम डिपो में नौ बसें मौजूद हैं। यानी कुल खरीदी गई 28 में से 11 बसें अभी ऑन रूट हैं।
शताब्दी से खाना और ब्रेक फास्ट हटा दिया जाए तो वोल्वो और शताब्दी के किराए में कोई विशेष फर्क नहीं
हरियाणा रोडवेज की वोल्वो बसों पर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि शताब्दी एक्सप्रेस से खाना और ब्रेकफास्ट हटा दिया जाए तो दोनों के टिकट दरों में कोई विशेष फर्क नहीं रह जाएगा। बावजूद इसके यात्रियों को शताब्दी के मुताबिक वोल्वो बसों में माकूल सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर दोनों में यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं के अंतर पर गौर करें तो वोल्वो बसों के अक्सर खराब होने की सूचना मिलती रहती है, वहीं शताब्दी में यात्रियों को ऐसी शिकायत नहीं रहती। वोल्वो बस दिल्ली से चंडीगढ़ तक आने में करीब पांच घंटे का समय लेती है, वहीं शताब्दी से यात्रियों को महज 3.25 घंटे का समय लगता है।
छह मर्सिडीज बसें चलाने का दावा
चंडीगढ़ डिपो के लिए 2013 में दस बसें खरीदी गईं थीं। अधिकारिक सूत्रों की माने तो अब चंडीगढ़ से दिल्ली के बीच चलने वाली इन बसों की हालत अच्छी नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इस एक बस की कीमत करीब 85 से 90 लाख रुपये है, लेकिन ये बसें वोल्वो के मुकाबले बेहतर साबित नहीं हुईं। दावा है कि 10 में से छह बसें चलाई जा रही हैं। बाकी खराब हो चुकी हैं।
28 बसें खरीदी गईं थीं
परिवहन विभाग ने साल 2012 में वोल्वो कंपनी से 30 बसें खरीदी गईं थीं। इसमें से 10 बसें चंडीगढ़ डिपो और 20 बसें गुरुग्राम डिपो को दी गईं। गुरुग्राम डिपो को मिली बसों में से दो बसें तकनीकी खराबी के कारण कंपनी को लौटा दी गईं।
कुछ दूर चलने पर हुई खराब
22 मई को दिल्ली एयरपोर्ट से हरियाणा रोडवेज की बस से चंडीगढ़ के लिए ली थी, लेकिन जैसे हीं बस एयरपोर्ट से रवाना हुई कुछ दूर चलने के बाद उसका एसी अचानक खराब हो गया। इस बीच मेन रोड पर यात्रियों को ढाई घंटे तक दूसरी बस के आने की प्रतीक्षा करनी पड़ी। गर्मी के चलते यात्रियों का बुरा हाल था, जब दूसरी वोल्वो बस वहां से मुहैया कराई तो यात्रियों ने राहत की सांस ली। क्योंकि बस फ्लाई ओवर पर खराब हुई। - विमला, सेक्टर-चार पंचकूला।
प्रॉपर कुलिंग की रहती है शिकायत
हरियाणा रोडवेज की वोल्वो बसों में पिछले दो तीन सालों में करीब आठ से दस बार सफर किया है। इनमें दो बार रोडवेज की बस खराब हुईं है। गर्मी के दिनों में खासकर गुरुग्राम से आने वाली बसों में यात्रियों को प्रॉपर कुलिंग की शिकायत रहती है। - रीतू, निवासी पंचकूला।
छात्र हुए सबसे ज्यादा परेशान
दिल्ली से चंडीगढ़ आते समय अंबाला से पहले शनिवार को सुबह करीब 11.45 बजे हरियाणा रोडवेज की वोल्वो बस अचानक खराब हो गई। जिसके चलते यात्री काफी देर तक परेशान रहे। दूसरी बस आने के बाद यात्रियों को काफी देर बाद चंडीगढ़ भेजा गया। इस बस में सात से आठ लड़के चंडीगढ़ टूरिज्म विभाग का पेपर देने के लिए जा रहे थे, वे ज्यादा परेशान थे, बस खराब होने के बाद परीक्षार्थियों ने काफी सोर मचाया। - मुकेश, निवासी पंचकूला।
जल्द ही खरीदी जाएगी नई बसें
सभी बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। बसों के खराब होने की शिकायत अक्सर मिल रही है। नई बसें जल्द सरकार की ओर से खरीदी जानी है। फिलहाल इन पुुरानी बसों को मरम्मत कर चलाया जा रहा है। - व्योम शर्मा, ट्रैफिक मैनेजर, चंडीगढ़ डिपो।