बदहाली के आंसू रोता सेक्टर-पांच का बस स्टैंड
पूरी ट्राइसिटी में बना एकमात्र बिना चहारदीवारी का बस स्टैंड, दो साल पहले विधायक ने दिए थे चहारदीवारी बनाने के निर्देश
- अब तक नहीं बनी बस स्टैंड की चारदीवारी
- बसों की टाइमिंग बताने वाली एलईडी भी बंद पड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर-पांच बस स्टैंड की हालत धीरे-धीरे शहर के बस क्यू सेल्टरों की तरह होती जा रही है। इसकी एंट्री और एग्जिट प्वाइंट की सड़कें पंचकूला शहर के ग्रामीण क्षेत्रों से भी खराब है। वहीं, हल्की बरसात के बाद बस स्टैंड और पार्किंग एरिया में बरसाती पानी भर जाता है। मोहाली और चंडीगढ़ बस स्टैंड से तुलना करें तो पंचकूला का बस स्टैंड बाहर से हीं देखने में जर्जर लगता है। इतना हीं नहीं अगर बस स्टैंड में आग लग जाए तो आगजनी जैसी घटनाओं से निपटने के लिए बस स्टैंड पर माकूल प्रबंध नहीं हैं। पूरी ट्राइसिटी में इकलौता बस स्टैंड है, जिसकी चहारदीवारी नहीं है। बता दें कि 2016 में पंचकूला विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने बस स्टैंड का दौरा किया था। उस समय विधायक ने बस स्टैंड की चहारदीवारी सहित बस स्टैंड की एंट्री और एग्जिट प्वाइंट को सही करने सहित बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए थे, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
शिकायत पट्टिका में धूल और मिट्टी:
पंचकूला बस स्टैंड के बाहर लगे पुलिस शिकायत पट्टिका की हालत भी खराब है। यह पूरी तरह से टूट चुकी हैं। शिकायत पट्टिका में लोगों की शिकायत की बजाय धूल-मिट्टी ने जगह बना ली है। इनकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि जब इन्हें लगाया गया था, उसके बाद से एक बार भी ये बदले नहीं गए।
बस स्टैंड पर लगी एलईडी बनी शोपीस
रेलवे स्टेशन की तर्ज पर बस स्टैंड पर यात्रियों को रूट से संबंधित जानकारी देने की योजना फीकी नजर आ रही है। बस स्टैंड पर लगी एलईडी केवल शोपीस बनी हुई है। जो अक्सर बंद मिलती हैं। इनमें बस की टाइमिंग कभी-कभार ही यात्रियों को दिख जाती है।
कंक्रीट सरिया डालकर नहीं बनाई जाती है सड़क
बार बार पंचकूला बस स्टैंड के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट टूट जाते हैं। क्योंकि बस स्टैंड पर आने वाली बसों के भार को देखते हुए यहां कंक्रीट सरिया डालकर मजबूत सड़क नहीं बनाई जाती। नतीजा एक माह के भीतर यहां की सड़कें दम तोड़ देती हैं।