नोएडा और रोहतक के ध्यानार्थ
कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) शिवानी ने चुना सिविल सर्विसेज का रास्ता
- दो साल से नहीं किया सोशल साइटों का किया इस्तेमाल
- सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परिवार को दिया श्रेय
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
देश और समाज सेवा के जज्बे की बदौलत पंचकूला की शिवानी कपूर ने एक नया मुकाम हासिल कर अपने प्रदेश और जिले का नाम रोशन कर दिया। कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिवानी, जॉब करने की बजाय खुद की मेहनत से सिविल सर्विसेज की तैयारियों का रास्ता चुना। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल शिवानी ने शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ के सेंट कबीर से की। जबकि 10वीं और 12वीं उन्होंने पानीपत के एमएएसडी स्कूल से की। सिविल सर्विसेज में 469 रैंक हासिल कर शिवानी ने पंचकूला का नाम रोशन किया है।
सेक्टर-10 में रहने वाली शिवानी कपूर ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और खुद की मेहनत को देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी तैयारियों के दौरान दो वर्ष तक न तो फेसबुक और न ही व्हाट्स एप का इस्तेमाल किया। हां, इसकी जगह उन्होंने टीवी और अखबार के जरिये देश-विदेश के घटनाक्रम से नियमित तौर पर अपडेट रहीं। बकौल शिवानी सोशल मीडिया भले ही जरूरी है, लेकिन अगर किसी मुकाम को हासिल करना है तो पढ़ाई के साथ-साथ जरूरी है कि खुद को उन बातों से दूर रखें, जिसमें वक्त लगता हो। दो वर्ष तक शिवानी किसी शादी समारोह में भी शरीक नहीं हुईं।
कॉमर्स ग्रेजुएट शिवानी ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में समाजशास्त्र को चुना जबकि सामान्य अध्ययन के लिए अन्य विषयों की किताबें और स्टडी मैटेरियल की मदद ली। शिवानी ने दिल्ली में रहकर अपनी पढ़ाई की, लेकिन तीसरी बार में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा में भी सफलता हासिल की। शिवानी के पिता राकेश कपूर, भारत पेट्रोलियम में सीनियर मैनेजर हैं जबकि मां रश्मि कपूर, भाई शिवओम और दादा एसडी कपूर ने हर वक्त पढ़ाई में शिवानी का सहयोग किया। पिता ने बताया कि शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही उनकी बेटी शिवानी के बारे में टीचर्स जब तारीफ शुरू करते थे तो पिता चुप हो जातेे थे। अपनी बेटी की इस सफलता पर उन्होंने खुशियां जाहिर करते हुए कहा कि बेटी ने एक बार फिर नाम रोशन किया है। शिवानी ने बताया कि उन्होंने आईएएस के बाद दूसरी च्वाइस आईआरएस के लिए दी है। किसी भी जिम्मेवारी को निभाने में वह सक्षम हैं।
पंचकूला हिंसा को लेकर इंटरव्यू में पूछा गया सवाल
सिविल सेवा के इंटरव्यू में भी शिवानी से पंचकूला में 25 अगस्त को हुई हिंसा को लेकर सवाल पूछा गया। हालात क्यों बिगड़े और ऐसी स्थिति में आप क्या करतीं, शिवानी ने इस सवाल के जवाब में बोर्ड के सदस्यों को बताया कि धारा-144 लागू होने के बाद भी इतने लोगों को प्रवेश करने से रोकना चाहिए। हजारों की संख्या में इकट्ठा हुए लोगों की वजह से पंचकूला में हिंसा का तांडव हुआ, लेकिन इसमें स्थानीय लोगों की भूमिका नहीं थी।