फैसला लागू हुआ तो बंद हो जाएंगे मोरनी के 25 प्रतिशत प्राइमरी स्कूल
- प्रदेश सरकार ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 20 से कम छात्रों की संख्या वाले स्कूलों को बंद करने का लिया फैसला
- रिटायर्ड अध्यापक बोले, शिक्षा विभाग नीतियों में बदलावा करे तो स्कूलों में बढ़ाई जा सकती है छात्रों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी।
प्रदेश सरकार की ओर से वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 20 से कम छात्रों की संख्या वाले स्कूलों को बंद करने के फैसले ने मोरनी के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। अगर सरकारी आदेशों पर शिक्षा विभाग इस फैसले को मोरनी में लागू करता है तो पंचकूला के मोरनी ब्लॉक में लगभग 25 प्रतिशत यानी लगभग पंद्रह प्राइमरी स्कूलों पर ताला लग सकता है। इस फैसले के लागू होने के बाद पूरे प्रदेश में सबसे अधिक संख्या में बंद होने वाले प्राइमरी स्कूलों में मोरनी का नाम पहले नंबर पर होगा। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के आगे शिक्षा ग्रहण करने का संकट खड़ा जाएगा। बता दें कि मोरनी एक पहाड़ी क्षेत्र है और यहां पर अभी भी सैकड़ों गांवों के बच्चों को अपने गांव से कई किलोमीटर दूर जंगली रास्तों से होकर स्कूल तक पहुंचना पड़ता है ऐसे में स्कूल बंद होने से उनकी परेशानियां तो बढे़गी ही साथ में उनके अभिभावकों की चिंता भी बढे़गी। शिक्षा विभाग की नीतियों से भली प्रकार वाकिफ व विभाग से रिटायर्ड अध्यापकों का मानना है कि अगर शिक्षा विभाग अपने कुछ नियमों में बदलाव करे तो कम संख्या वाले स्कूलों में भी बच्चों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है।
अभी दो से तीन किमी. का रास्ता तय कर पहुंचते हैं स्कूल
पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से मोरनी के गांवों में रहने वाले बच्चों को दो से तीन किमी. का रास्ता तय कर स्कूल पहुंचना पड़ता है। इस दौरान रास्तों में जंगली जानवरों का भी खतरा बना रहा है। ऐसे में अगर सरकार का फैसला मोरनी में लागू हुआ तो प्राइमरी स्कूल के छात्रों को पांच से छह किमी. दूरी तय कर दूसरे स्कूल में जाना पड़ेगा। वहीं, इतना लंबा सफर तय करने के बाद प्राइमरी स्कूल का छात्र क्लास में कितना ध्यान लगा पाएगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकारी स्कूल में घटती संख्या का मुख्य कारण तय उम्र सीमा
सरकारी स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों का मानना है कि सरकारी स्कूल में बच्चे को दाखिले के लिए कम से कम पांच साल पांच महीने का होना जरूरी है तभी उसे दाखिला दिया जाता है जबकि इसके विपरीत प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को दाखिला तीन वर्ष की उम्र में नर्सरी कक्षाओं में दे दिया जाता है। जोकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या का मुख्य कारण है। सरकार को अपने नियमों में बदलाव करना चाहिए।
जिले के 22 और मोरनी के 15 स्कूल हो सकते हैं बंद
हरियाणा सरकार व शिक्षा विभाग अगर इस फैसले को लागू कर देते हैं तो पूरे प्रदेश के कुल 231 स्कूलों व जिले में 22 और अकेले मोरनी में ऐसे स्कूलों की संख्या 15 के लगभग है। मोरनी के जिन स्कूलों में गाज गिर सकती है उनमें मुख्यत: बालग, भींवर, लेटबटोली, काजड़, समलौठा, शेरला, खरक, बहलों, गझान, दयौड़ा आदि गांवों के स्कूल शामिल हैं।