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हरियाणा दलित मोर्चा एवं अन्य संगठनों द्वारा पंचकूला में पैदल मार्च निकाला गया

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दलित समाज के बंद का पंचकूला में छिटपुट असर दिखा
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- हरियाणा दलित मोर्चा और अन्य संगठनों की ओर से पंचकूला में पैदल मार्च निकाला
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससीएसटी एक्ट को खत्म करने के फैसले के विरोध में उपायुक्त को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
- शाम को लांग रूट की बसें सुचारु रूप से बहाल की गई
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
दलित समाज द्वारा बंद का सोमवार को कहीं-कहीं असर दिखा। कुछ मार्केट में दलित समाज के लोगों ने दुकानें बंद करवाईं। वहीं यातायात की बात करें तो सिटी बस सर्विस चालू रही। जबकि लांग रूट की बसों की आवाजाही सुबह 11 से शाम पांच बजे तक बंद कर दी गई थी। जब दूसरे जिलों में हालात ठीक हुए, तो शाम को लांग रूट की बसें सुचारु रूप से बहाल की गई।
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हरियाणा दलित मोर्चा और अन्य संगठनों की ओर से पंचकूला में पैदल मार्च निकाला गया। पंचकूला राजीव कॉलोनी से लेकर लघु सचिवालय स्थित जिला उपायुक्त कार्यालय की ओर कूच किया। एससी एसटी समाज के आह्वान पर भारत बंद का पंचकूला में कुछ खास असर नहीं दिखा। हरियाणा दलित मोर्चा के प्रधान दलबीर सिंह, रामप्रसाद के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने के फैसले का विरोध किया और इसके बाद जिला उपायुक्त को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सर्व कर्मचारी संघ और सीटू कर्मचारी ने समाज के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने पंचकूला सेक्टर 17-18 चौक को जाम लगा दिया, इस दौरान यातायात प्रभावित हुई, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। संगठनों ने मांग करते हुए कहा कि उक्त कानून को वर्ष 1989 में एससी/एसटी वर्ग के गरीब, लाचार व कमजोर व्यक्तियों पर अत्याचार रोकने के लिए बनाया गया था। समिति ने ज्ञापन में बताया कि अभी भी अत्याचारों का सिलसिला जारी है। अधिकांश मामलों में पीड़ित व्यक्ति अत्याचार सहकर चुपचाप घर बैठा रहता है, या फिर थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाने भी जाता है, तो उसकी रिपोर्ट दर्ज न कर उसे डरा-धमकाकर वहां से भगा दिया जाता है। वहीं अगर रिपोर्ट दर्ज भी कर ली जाती है, तो उस पर एससी/एसटी एक्ट नहीं लगाया जाता। यदि अगर मामला दर्ज भी कर लिया जाता है, तो अधिकारी की ओर से निष्पक्ष जांच न कर फाइनल रिपोर्ट में मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। वहीं अगर मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी जाती है तो, अपराधियों द्वारा गवाहों को लालच देकर या डरा धमका कर उन्हें तोड़ लिया जाता है। इन संगठनों ने जिला उपायुक्त मुकुल कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि दूसरी तरफ इन वर्गो के पीड़ित व्यक्ति की तत्काल रिपोर्ट न दर्ज करने, अपराधी को अग्रिम जमानत का लाभ देने और अपराधी की गिरफ्तारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति से करने के आदेश पारित कर दिये जाने से इन वर्गों पर अधिक अत्याचार बढ़ेंगे। ज्ञापन देश के राष्ट्रपति समेत मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, केंद्रीय कानून मंत्री, हरियाणा के राज्यपाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री, एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन के नाम भी दिया है।
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