सरस मेले में हुई एक करोड़ 13 लाख की बिक्री
- देश भर से करीब 600 हस्तशिल्प कलाकारों ने लिया था भाग
- सेक्टर-पांच के परेड ग्राउंड में आयोजित सरस मेला में बतौर मुख्यातिथि पहुंची मंत्री कविता जैन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर-पांच स्थित परेड ग्राउंड में 12 दिवसीय राष्ट्रीय सरस मेले के समापन के मौके पर हरियाणा की शहरी स्थानीय निकाय एवं सूचना, जन संपर्क एवं भाषा मंत्री कविता जैन ने बतौर मुख्यातिथि पहुंची। इस दौरान मंत्री ने सांस्कृतिक संध्या का भी शुभारंभ किया। मंत्री ने बताया कि मेले में देश भर से करीब 600 हस्तशिल्प कलाकारों ने भाग लिया और करीब 350 स्टाल यहां पर नि:शुल्क प्रदर्शित करवाई गई, जिनमें प्रदेश के 86 स्टॉल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस मेले में एक करोड़ 13 लाख रुपये की सेल भी हुई। साथ ही मेले में लकड़ी उत्पाद, मूर्तियां, फर्नीचर, हिंदु भगवान बालाजी, गणेश, सरस्वती, कृष्ण नटराज, शिव परिवार, लकड़ी से नक्काशी किया मटका इत्यादि प्रदर्शित किया था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की खादी, कोहलापुरी चप्पल, कश्मीर का पश्मीना, मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ी भी देखने को मिली। मेले में हरियाणा के जींद, रोहतक, मेवात, करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र तथा हिसार से आए हथकरघा तथा बुनकरों द्वारा विभन्न आधुनिक डिजाईनों के उत्पाद के स्टाल लगाए गए, जिन पर जरी वर्क वाली कोहलापुरी चप्पल, हाथ से बनी ज्वेलरी, हर्बल प्रोडक्ट, फोटो फ्रेम तथा टैक्सचर पेंट, हाथ से बनाए गए लकड़ी के बर्तन इत्यादि को प्रदर्शित किया हुआ था। पंजाब के पटियाला से पंजाब के पारंपरिक वस्त्र फुलकारी की विभिन्न किस्मों को प्रदर्शित किया। इसमें फुलकारी सूट, साड़ी के अलावा बूटी सूट, खद्दर बाग की किस्मों के कपड़े के डिजाइन भी लोगों की रुचि में शामिल हुए। कर्नाटक से बालों के तेल, गुजराती कढ़ाई के सामान बैग, चद्दर, सूट, आंध्रा प्रदेश के खरोशिया के सामान, मैसूर से शालिगराम, रुद्राक्ष, नव रत्न, झारखंड की जड़ी-बूटियां, हैदराबाद का 100 फीसदी कॉटन का कपड़ा, छत्तीसगढ़ का रॉ सिल्क, बनारसी सिल्क सूट व साड़ी, गुजराती सिल्क, छत्तीसगढ़ की खादी, बिहार के मटका सिल्क, खादी कॉटन व तसर सिल्क, कश्मीर से पश्मीना व सूई की कढ़ाई के कपड़े, उत्तर प्रदेश का चिकन वर्क, जूट के बैग, आसाम से बांस से बने उत्पाद, दिल्ली की टेंपल ज्वेलरी, मथुरा का कॉटन के अलावा उत्तराखंड के उत्पाद भी प्रदर्शित किए थे। उन्होंने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों की धरती है और यहां पर विभिन्नताओं में भी एकता पाई जाती है। हरियाणा सरकार चाहे सूरजकुंड मेला हो, सरस मेला, गीता जयंती उत्सव व कुरुक्षेत्र में लगने वाले मेले हों, का आयोजन समय-समय पर करवा रही है।