12 दिवसीय राष्ट्रीय सरस मेले में हो रहे भारत दर्शन
- करीब 350 स्टालों में भारत के विभिन्न भागों से आए हथकरघा उत्पादकों व बुनकरों ने लगाई प्रदर्शनी
- सरस मेले के पांचवें दिन राजकीय महाविद्यालय कालका के कलाकारों की टीम ने सांस्कृतिक संध्या में दी प्रस्तुति
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर-पांच के परेड ग्राउंड में लगा सरस मेला ट्राइसिटी के लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन रहा है। प्रतिदिन मेले में दर्शकों की संख्या बढ़ती जा रही है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों के हथकरघा उत्पादों की करीब 350 स्टालें प्रदर्शित की गई हैं। यहां जहां पंजाब का पटियाला सूट हैं तो वहीं बनारसी सिल्क भी है, उत्तर प्रदेश की खादी है तो कोल्हापुरी चप्पल भी, कश्मीर का पश्मीना है तो मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ी भी। यह पूरा मेला अपने आप में भारत है। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सरस मेला-2018 में महाराष्ट्र के प्रसिद्ध हथकरघा सूट व कोल्हापुरी चप्पल का स्टाल लगाया गया है, जो मेले में काफी लोगों के लिए आकर्षण केन्द्र बन रहा है। इसके अलावा मेले में हरियाणा के जींद, रोहतक, मेवात, करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र व हिसार से आए हथकरघा तथा बुनकरों द्वारा विभिन्न आधुनिक डिजाइनों के उत्पाद के स्टाल लगाए गए हैं, जिन पर जरी वर्क वाली कोल्हापुरी चप्पल, हाथ से बनी ज्वैलरी, हर्बल प्रोडक्ट, फोटो फ्रेम व टेक्सचर पेंट, हाथ से बनाए लकड़ी के बर्तन इत्यादि को प्रदर्शित किया है। इन स्टालों पर लोग अपने मनपसंद सामान की खरीददारी भी कर रहे हैं। इसके साथ-साथ मेले में पटियाला से पंजाब के पारंपरिक वस्त्र फुलकारी की विभिन्न किस्मों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें फुलकारी सूट, साड़ी के अलावा बूटी सूट, खद्दर बाग की किस्मों के कपड़े के डिजाइन भी लोगों की रुचि में शामिल हो रहे हैं। कर्नाटक से बालों के तेल की स्टाल पर भी दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है। गुजराती कढ़ाई के सामान को खरीदने के लिए सरस मेला उत्तम स्थान है, क्योंकि यहां पर गुजराती कढ़ाई के हर प्रकार के सामान जिसमें बैग, चद्दर, सूट इत्यादि को प्रदर्शित किया गया है। मेले में आंध्र प्रदेश के खरोशिया का सामान, मैसूर से शालिग्राम, रुद्राक्ष, नवरत्न, झारखंड की जड़ी-बूटियां, हैदराबाद का 100 फीसदी कॉटन का कपड़ा, छत्तीसगढ का रॉ सिल्क, बनारसी सिल्क सूट व साड़ी, गुजराती सिल्क, छत्तीसगढ़ की खादी, बिहार के मटका सिल्क, खादी कॉटन, कश्मीर से पश्मीना व सूई की कढ़ाई के कपड़े, उत्तर प्रदेश का चिकन वर्क, जूट के बैग, आसाम से बांस से बने उत्पाद, दिल्ली की टैंपल जवेलरी, मथुरा का कॉटन के अलावा उत्तराखंड में बनने वाले दर्द निवारक तेल को भी प्रदर्शित किया गया है, जो सूरज के ताप से तैयार किया जाता है। नासिक की स्टाल पर काले मुनक्के प्रदर्शित किए गए हैं। इन मुनक्कों की खासियत ये है कि इनमें युरिक एसिड की मात्रा नहीं होती और इनकी तासीर और मुनक्कों की तरह गरम भी नहीं होती। वहीं मेले में मध्य प्रदेश के इंदौर से लगाई गई स्टाल में कारीगर अपना सामान बनाते दिखे। कारीगरों का कहना है कि यह काम इंदौर के अलावा भारत में सिर्फ वही करते हैं। सरस मेले में प्रतिदिन आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों को हर रोज भारत के किसी न किसी हिस्से के दर्शन करवाते हैं। आज सरस मेले के पांचवें दिन राजकीय महाविद्यालय कालका के कलाकारों की टीम ने सांस्कृतिक संध्या में समय बांधा, जिनमें रणदीप और अश्वनी ने हरियाणवी सांग, जनमय से सूफी गायन व वीना ग्रुप द्वारा घूमर डांस की प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा सांस्कृतिक संध्या के दौरान विरासत कला केन्द्र बठिंडा की ओर से भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।