यूनिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुआ राज सिंह दहिया का नाम
- लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस में तीन बार नाम दर्ज कर बना चुके हैं हैट्रिक
अमर उजाला ब्यूरो
कालका।
रोहतक में जन्मे राज सिंह दहिया ने अपने शौक की बदौलत यूनिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ की फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज करवाया है। इन्होंने 199 दस्तावेज- 786 नंबर के और कुल 2025 दस्तावेज इकट्ठा करके जिसमें बैंक चैक, डीडी, एफडी, एनएससी, एलआईसी पॉलिसी, मैट्रो कार्ड, नेपाल महात्मा बुद्ध के जन्म स्थान की एंट्री टिकट, वैक्स म्यूजियम शिमला, दान-रसीद इत्यादि विभिन्न राज्यों से 6 साल की कड़ी मेहनत करके इकट्ठा किया है।
1991 से भारतीय रेल में सेवारत राज सिंह दहिया, गार्ड मेल एक्सप्रेस, अंबाला मंडल के अंर्तगत कालका स्टेशन पर कार्यरत है। शुरू से ही कुछ अलग करने का जुनून रखने वाले दहिया ने साल 2015, 2016 और 2017 में लगातार लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में अपना स्थान बना चुके हैं। बचपन में विभिन्न देशों की करेंसी, सिक्के व डाक टिकटें उन्हें मर्चेन्ट नेवी में रहे अपने पिता रामफल दहिया से प्राप्त हुए। जिसने संग्रह के शौक को मजबूत किया। यह शौक कॉलेज व नौकरी प्राप्त करने के चक्कर में लुप्त हो गया था। 2012 में उनके पुत्र जयराज दहिया द्वारा माचिस संग्रह को एक प्रदर्शनी में देखने के बाद यह शौक दोबारा से जागृत हो गया और उन्होंने फिर से अपने शौक को परवान चढ़ाने की ठानी। रेलवे की फैंसी गत्तेवाली टिकटें (786 नंबर की-500 से ज्यादा टिकटें, 00000 नंबर की-47 टिकटें, 11111 से 99999 नंबर की-27 टिकटें, 10,000 से 90,000 नंबर की-27 टिकटें, एक से 100 तक की लगातार गिनती की टिकटें, 100 से 1 तक की उल्टी गिनती की टिकटें, 00786 की 15 टिकटें, 00100 से 00900 की 18 टिकटें और 00111 से 00999 की 18 टिकटों) का संग्रह करके अपना नाम तीन बार लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज करवाकर हैट्रिक बनाई।
मंडल रेल प्रबंधक आवार्ड से हो चूके है सम्मानित:
रेलवे में अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी प्रशंसा की और प्रोत्साहन दिया। अप्रैल 2017 में रेलवे अम्बाला मंडल ने ‘मंडल रेल प्रबंधक अवार्ड’ देकर सम्मानित किया।
मैग्जीन में भी रहे है चर्चे:
दहिया का नाम रेलवे की अन्य मैग्जीनस (अम्बाला दर्पण, राजभाषा हिन्दी-उत्तर रेलवे बड़ौदा, नई दिल्ली, इंडियन रेलवे मैग्जीन, रेलवे बोर्ड और रेल बंधु मैग्जीन शताब्दी व राजधानी एक्सप्रेस) में दर्ज हो चुका है। इस कार्य में दहिया का इनके परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों, इनके मित्रों व कर्मचारी साथियों का पूरा सहयोग रहा है।
बेटा भी करवा चुका है लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज
ज्ञात रहे कि राज सिंह दहिया के सपुत्र जयराज दहिया ने भी 2017 में 50 विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की 1000 से अधिक फोटो संग्रह करके अपना नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज करवाने का गौरव हासिल किया है।